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    Home»Top Story»जामताड़ा में फलता फूलता रहा साइबर क्राइम, सोयी रहीं सरकारें
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    जामताड़ा में फलता फूलता रहा साइबर क्राइम, सोयी रहीं सरकारें

    azad sipahi deskBy azad sipahi deskFebruary 8, 2020No Comments10 Mins Read
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    आज की खबर विशेष में हम बात कर रहे हैं झारखंड और खासकर जामताड़ा में बरगद का रूप धारण कर चुके साइबर क्राइम की। आज जामताड़ा को पूरे देश में लोग साइबर क्राइम कैपिटल के रूप में जानते हैं। साइबर अपराध और अपराधियों ने इस छोटे से शहर को भारत के नक्शे पर ला दिया है। यह शहर आज देश और दुनिया में झारखंड के माथे का कलंक बन चुका है। उससे भी बड़ी चिंता की बात है कि यहां साइबर क्राइम और क्रिमिनल फल-फूल कर वटवृक्ष बन गये, पर सभी सरकारें सोयीं रहीं। किसी ने भी इसे साइबर क्राइम के हब के रूप में उभरने से नहीं रोका। यहां तक कि किसी ने इसकी चर्चा तक करना मुनासिब नहीं समझा। ये पूरे देश-दुनिया को लूटते रहे और पुलिस और प्रशासन जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करते रहे। हां, जब भी इन साइबर ठगों ने किसी बड़ी हस्ती, राजनेता या अधिकारी को निशाना बनाया, प्रशासन जरूर सक्रिय दिखा। चाहे इसकी वजह संबंधित राज्यों की पुलिस रही हो या कोई राजनीतिक दबाव। इधर हाल के दिनों में भले ही साइबर क्राइम पर नियंत्रण को लेकर बातें जरूर होने लगी है, परंतु सच्चाई यही है कि आज जामताड़ा साइबर क्राइम का ट्रेनिंग हब बन चुका है और झारखंड के माथे पर बदनुमा दाग भी। पेश है अजय शर्मा की रिपोर्ट।

    जामताड़ा झारखंड का एक छोटा सा जिला है। लेकिन इसके कारनामे देश ही नहीं, विदेशों में भी गूंजते हैं। यहां ठगों का राज चलता है। मोबाइल हैकिंग, मोबाइल ट्रैकिंग और साइबर ठगी के बजाप्ता स्कूल चल रहे हैं। जिस तरह से स्कूलों में बच्चों की भीड़ होती है, ठीक उसी तरह जामताड़ा के गांवों में मोबाइल से ठगी करने के तरीके बच्चों को सिखाये जाते हैं। कम पूंजी में अगर गलत तरीके से पैसा कमाने का हुनर सीखना हो, तो जामताड़ा जाइये। जरूरत सिर्फ एक लैपटाप और चार-पांच अलग-अलग कंपनियों के सिम की है। यहां ऐसा कोई गांव नहीं है, जहां के युवा इस धंधे में पारंगत नहीं हैं। अचानक जामताड़ा, ठगी के पैसे से बदल गया। अधिकांश घर मिट्टी से पक्के मकान में बदल गये। पुलिस प्रशासन भी इन युवकों के आगे घुटने टेक चुका है। युवा सुबह उठते हैं और सुनसान जगह में जाकर सिर्फ बाहरी लोगों को फोन कर उनके बैंक एकाउंट हैक करने के धंधे में लग जाते हैं। दिनभर में कोई न कोई व्यक्ति इनके झांसे में आ ही जाता है और इनका शिकार बन जाता है। ये बड़े आराम से आॅनलाइन मार्केटिंग कर लेते हैं। कभी किसी को एटीएम कार्ड बंद होने, एकाउंट फ्रीज होने के बारे में झूठ बोलते हैं। बैंक अधिकारी बन कर एटीएम का पिन या नंबर मांगते हैं। कभी कभी तो फेसबुक पर दोस्त बनकर मूर्ख बनाते हैं और पैसे ठग लेते हैं।

    कम पढ़े लिखे युवा अच्छों-अच्छों को बना रहे बेवकूफ
    साइबर क्राइम मतलब वैसा क्राइम जिसमें नेटवर्क, इंटरनेट का इस्तेमाल हुआ हो। इस शब्द को सुनकर ऐसा लगता है कि इसे कोई टेक्नोलॉजी का अच्छा जानकार ही कर सकता है। लेकिन ऐसा नहीं है। असल में ये जिस इंसान का दिमाग है ना, यह उसे हर चीज के संग खुराफात करने के आइडियाज दे देता है और इसी में इंसान खुद को खुद से ट्रेंड कर लेता है। यह क्राइम भी कुछ ऐसा ही है। अब फिशिंग क्राइम को ही देख लीजिए। यह साइबर क्राइम के अंदर आनेवाला वह अपराध है, जिसे आम दिमाग और कम पढ़े-लिखें लोग भी आसानी से कर लेते हैं। 2016 से लेकर 2017 में इस क्राइम के हजारों मामले सामने आये। दिल्ली, मुंबई से लेकर देश के हर बड़े शहरों के अच्छे—अच्छे लोग इस ठगी का शिकार हुए। इतना तो तय था कि कोई बड़ा नेटवर्क इसके पीछे है, लेकिन यह नहीं पता था कि इस क्राइम का असल केंद्र झारखंड के जामताड़ा में है। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात थी कि ये काम करमाटांड़-नारायणपुर जैसे ऐसे गांवों से हो रहे थे, जहां डेवलपमेंट का नामों निशान तक नहीं था।

    90 फीसदी से ज्यादा क्राइम साइबर
    हैलो.. सर मैं फलाना बोल रहा हूं। सर बताना चाहूंगा कि आपका एटीएम कार्ड ब्लॉक हो गया है। अगर आप अपने कार्ड को एक्टिवेट कराना चाहते हैं तो अपने एटीएम कार्ड का नंबर और सीवीवी बतायें। सर एक कोड आया होगा- वह बताइए, बस इतनी सी बात और लोगों के अकाउंट से एक सेकेंड में हजारों से लेकर लाखों रुपये गायब हो गये। हैलो कभी यह आवाज यहां के सुनसान इलाकों और जंगलों में बहुत सुनाई देती है। लेकिन तीन से चार सालों से इस जगह ने पूरे देश के लोगों को परेशान कर रखा है, जिसके कारण यह जगह देश भर में साइबर क्राइम कैपिटल नाम से मशहूर हो गया। एक और अनोखी बात है इस जगह के बारे में कि ये देश की पहली ऐसी जगह है, जहां पुलिस स्टेशन नहीं साइबर पुलिस स्टेशन है। क्योंकि यहां होनेवाले 90 प्रतिशत से ज्यादा क्राइम साइबर से ही जुड़े हैं।

    देखते देखते बना साइबर क्राइम कैपिटल
    देखा जाये, तो जामताड़ा का रिकॉर्ड ऐसा नहीं है कि कभी क्राइम से नहीं जुड़ा रहा हो। यहां के लोग पहले वैगेन ब्रेक्रिंग के काम में बहुत ज्यादा जुड़े हुए थे। इसके बाद यहां ट्रेन पैसेंजर्स को नशीला पदार्थ खिला कर लूटने की घटनाएं बढ़ीं। इसी तरीके से इस इलाके में क्राइम होते रहे हैं। लेकिन 2014 के बाद जिस तरीके से डिजिटल क्रांति हुई है, उस हिसाब से यहां के क्राइम में भी इजाफा हुआ और फिर यह जगह साइबर क्राइम का गढ़ बन गया।

    58.71 आबादी बेरोजगार, लेकिन संपन्न घरों की भरमार
    जामताड़ा जहां की आबादी करीब 7.91 लाख की है और साक्षरता की दर 64.59% है। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि यहां की 58.71 फीसदी आबादी कुछ नहीं करती और ज्यादातर लोग खेती—बाड़ी के काम से जुड़े हुए हैं। लेकिन ये आंकड़े देखकर आप यह मत सोचिएगा कि यह जगह बहुत पिछड़ी हुई है। असल में यह जगह हाथी के दांतों की तरह है, जो बाहर से तो दिखने में एक देहाती इलाके जैसा लगता है। लेकिन जैसे ही आप इसके अंदर जाते हैं, आपको बड़े शानदार घर, हवेलियां और हर उस फैसिलिटी को एन्जॉय करते हुए लोग मिल जायेंगे, जो आमतौर पर लोगों की कल्पना में सिर्फ शहरों में देखने को मिलते हैं।

    देश भर के 80 फीसदी साइबर क्राइम यहीं से आॅपरेट होते हैं
    देश में होनेवाला 80 पर्सेंट फिशिंग क्राइम यहीं से आॅपरेट होता है। इस गांव के फिशिंग क्रिमिनल्स ने हैलो की आवाज से देशभर के खास और आम आदमी को अपना निशाना बनाया है। सुपर स्टार अमिताभ बच्चन से लेकर न्यायिक पदाधिकारी, आइएएस, आइपीएस, पुलिस के जवान, पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी, केंद्रीय मंत्रियों और आम गरीब के खाते से यहां के शातिरों ने करोड़ों की रकम उड़ायी है। आलम यह है कि देश भर के राज्यों की पुलिस जामताड़ा में रेड मारने पहुंच चुकी है। लेकिन आज भी यहां साइबर क्राइम फल-फूल रहा है। 2019 में करीब 109 लोगों की गिरफ्तारी जामताड़ा में साइबर क्राइम के मामले में हुई। जिनके पास से पुलिस को 224 मोबाइल, 354 सिमकार्ड, 163 एटीएम कार्ड, 83 पासबुक, 30 मोटरसाइकिल, 12 फोर व्हीलर, 23 चेकबुक और 15,44,000 कैश रुपया बरामद हुआ।

    कैसे होता है फिशिंग का क्राइम और क्या है पुलिस की मुश्किलें
    जामताड़ा में फिशिंग क्राइम के इतना फलने—फूलने के पीछे का सबसे बड़ा कारण है इस इलाके की जियोग्राफिकल कंडीशन। यह इलाका मैदानी है और आस-पास घने जंगल हैं। फिशिंग करनेवाले ज्यादातर कम उम्र के युवा हैं, जो स्कूल ड्रॉप हैं। ज्यादातर तो पांचवीं भी पास नहीं हैं। लेकिन इसके बाद भी देश भर में इनके क्राइम के कारण बड़े—बड़े लोग परेशान हुए। पुलिस बताती है कि 2011 में यहां के युवाओं का एक ग्रुप गांव से बाहर कमाने के लिए गया और वहां से उन्होंने मोबाइल फोन को बिना पैसे दिये रिचार्ज करने की ट्रिक सीखी और वापस आये। इसके कुछ सालों बाद यहां बैक अकाउंट से पैसे निकाले जाने के मामले सामने आने लगे।
    इस मामले में आरोपी दिवाकर मंडल (11 मार्च 2017 को गिरफ्तार) ने बताया था कि उसने अपने चचेरे भाई मिथुन मंडल के संग नकली सिम कार्ड इकट्ठा किये और इस काम से जुड़ गया। उसने कहा कि हमारे आस—पास के लोग साइबर क्राइम करके अमीर हो गये। उसने अपने बयान में सिम कार्ड, मोबाइल और बहुत से फर्जी अकाउंट नंबरों के बारे में जानकारी दी थी। दिवाकर केवल 22 साल का था। उसके बयान ने इस क्राइम को लेकर कई सारे पहलुओं को सामने रखा था। इस क्राइम में पहले नॉर्मल काम हाते थे जैसे कि, कहीं से बैंक अकाउंट होल्डर्स के नाम और नंबर अरेंज किये जाते थे, फिर रैंडमली उन्हें कॉल करके उनके अकाउंट के बंद होने या एटीएम/ क्रेडिट कार्ड के ब्लॉक होने की बात कह कर किसी तरह से लोगों से डिटेल लेकर अकाउंट से पैसे उड़ा लिये जाते थे। इस क्राइम को करनेवाले लोग गांव के ही दूसरे लोगों को कुछ लालच देकर उनके अकाउंट का इस्तेमाल उड़ाये गये पैसे डालने के लिए करते थे। लेकिन बाद में बढ़ते डिजिटलाइजेशन के युग में इन लोगों ने खुद को इसके हिसाब से ढाला। पहले अकाउंट तक सीमित रहने वाले ये लोग पेटीएम, फ्रीचार्ज, पे—पल जैसे एप्स के वैलेट से भी पैसे उड़ाने शुरू किये। इसके लिए वे बाकायदा ट्रेनिंग लेते हैं। इस काम में जो थोड़े पुराने हो गये, वे नये लोगों को भर्ती कर उन्हें इस बाबत ट्रेनिंग भी दिया करते।

    150 में 100 गांव साइबर क्राइम से जुड़े
    पूरे राज्य में सबसे ज्यादा गिरफ्तारियां जामताड़ा में ही हुईं हैं। लगभग 406। करमाटांड़ थाने की बात करें तो इस इलाके में कुल 150 गांव हैं। पुलिस के आंकड़ों की मानें तो 100 गांवों के युवा साइबर अपराध से जुड़े हैं। वहीं इस काम में 12 से 25 साल के करीब 80 प्रतिशत युवा इससे जुड़े हैं। पहले तो ये युवा सुनसान इलाकों से इस काम को अंजाम देते थे। लेकिन अब ये अपने घरों में बैठकर या किसी होटल से भी यह काम कर रहे हैं। वहीं काम होने के बाद ये लोग अपने सारे सबूत मिटा देते हैं, जिससे पुलिस के लिए इन्हें ट्रेस करना काफी मुश्किल हो जाता है।

    कभी विद्यासागर की कर्मभूमि रही थी
    जामताड़ा आज भले ही साइबर क्राइम के गढ़ के नाम से जाना जाता हो, लेकिन कभी यह जगह ईश्वर चंद्र विद्यासागर की कर्मभूमि हुआ करती थी। इसी जगह पर उन्होंने जिंदगी के 18 साल गुजारे थे और समाज सेवा में अपना जीवन लगाया था। आज भी उनसे जुड़े कई प्रमाण यहां हैं। लेकिन बावजूद इसके आज की पीढ़ी के लिए यह जगह किसी टूरिस्ट प्लेस में बदल नहीं सकी न लोगों का ध्यान यहां गया। लेकिन साइबर क्राइम के कारण यह जगह देश भर की पुलिस के यहां पहुंचने का कारण जरूर बन गयी। उधर, राज्य सरकारों ने भी इसके अन्य पहलुओं या विकास को लेकर कभी चिंता नहीं की। यह भी नहीं देखा गया कि किस तरह यह साइबर क्राइम कैपिटल के रूप में आगे बढ़ता जा रहा है।

    जामताड़ा में साइबर क्राइम को मिलने लगी है सामाजिक मंजूरी
    साइबर क्राइम के इस धंधे ने यहां के युवाओं को बिना मेहनत के ही अधिक पैसा कमाने का मौका दे दिया है। उनकी लाइफस्टाइल भी इसी से बदली है। पैदल चलने वाले लोग अचानक महंगी चमचमाती गाड़ियों में घूमने लगे हैं। फि शिंग के कारण आये इस बदलाव से यहां के परिवार और समाज के लोग भी अपने युवाओं के इस काम को करने का समर्थन करते हैं। यहां के लोग इस बात को अच्छी तरह समझ चुके हैं कि इंडिया में जहां 29 मिलियन क्रेडिट कार्ड, 828 मिलियन डेबिट कार्ड और 105 बिलियन बैंक अकाउंट हैं। और तेजी से होते डिजिटलाइजेशन को सेफ बनाने का एक कमजोर मैकेनिज्म है, वहां फिशिंग जैसा काम कभी ठप नही होगा और शायद यही कारण है कि इस अपराध को यहां का समाज क्राइम नहीं मानता। यहां के लोगोंके बीच तो यह मैसेज फैला है कि बच्चों को बेहतर पढ़ाई कराने से अच्छा है साइबर अपराधी बनाओ।

    Cybercrime flourishing in Jamtara governments sleeping
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