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    Home»देश»परीक्षा जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं, सर्वांगीण विकास जरूरी : प्रधानमंत्री
    देश

    परीक्षा जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं, सर्वांगीण विकास जरूरी : प्रधानमंत्री

    shivam kumarBy shivam kumarFebruary 6, 2026No Comments3 Mins Read
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    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को ‘परीक्षा पे चर्चा’ के नौवें संस्करण में देश के विभिन्न हिस्सों से यहां आए छात्रों से संवाद करते हुए कहा कि परीक्षा कभी भी जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं हो सकती। शिक्षा जीवन निर्माण का माध्यम है और उसका उद्देश्य सर्वांगीण विकास होना चाहिए। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे बीते समय की चिंता छोड़कर शेष समय का बेहतर उपयोग करने पर ध्यान दें और तनावमुक्त रहकर सीखने की प्रक्रिया का आनंद लें।

    मणिपुर की एक छात्रा के सवाल पर प्रधानमंत्री ने कहा कि जो बीत गया है उसकी गिनती करने में समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। उन्होंने अपने जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि 17 सितंबर को उनके जन्मदिन पर एक नेता ने फोन किया और बोले कि अब आप 75 के हो गए, तो मैने कहा कि अभी 25 बाकी हैं। उन्होंने कहा कि जो बीता है मैं उसे गिनता नहीं हूं। जो बचा है उसको गिनता हूं। उन्होंने छात्रों से भी यही दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया और कहा कि जो बीता है उसकी गिनती में समय बर्बाद मत कीजिए, जो बचा है उसको जीने के लिए सोचिए।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षा केवल अंक प्राप्त करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। अच्छे शिक्षक वे होते हैं जो छात्रों के संपूर्ण विकास पर ध्यान देते हैं, न कि केवल परीक्षा में अच्छे अंक दिलाने पर। जीवन केवल परीक्षाओं के इर्द-गिर्द नहीं घूमता और परीक्षा आत्ममूल्यांकन का एक माध्यम मात्र है।

    अलग-अलग अध्ययन पद्धतियों को लेकर भ्रम पर पूछे गए सवाल पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह स्थिति जीवन भर बनी रहती है। प्रधानमंत्री बनने के बाद भी लोग उन्हें अलग-अलग तरीके से काम करने की सलाह देते हैं। सलाह जरूर लें, लेकिन वही करें जो आपके स्वभाव और परिस्थितियों के अनुकूल हो।

    एक छात्र द्वारा शिक्षक के बहुत तेज पढ़ाने की शिकायत पर प्रधानमंत्री ने शिक्षक के दृष्टिकोण से उत्तर देते हुए कहा कि शिक्षक को छात्रों से एक कदम आगे रहना चाहिए, ताकि लक्ष्य चुनौतीपूर्ण रहे लेकिन असंभव न हो। वहीं छात्रों को शिक्षक द्वारा पढ़ाये जाने वाले पाठ को पूर्व में अध्ययन कर शिक्षक से दो कदम आगे रहने की सलाह भी दी।

    कौशल विकास पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जीवन कौशल और पेशेवर कौशल दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने संतुलन पर जोर देते हुए कहा कि जैसे शरीर का संतुलन बिगड़ने पर व्यक्ति गिर जाता है, वैसे ही जीवन में किसी एक पक्ष पर अत्यधिक जोर नुकसानदेह हो सकता है।

    गेमिंग से जुड़े सवाल पर प्रधानमंत्री ने कहा कि गेमिंग एक कौशल है और यह व्यक्तित्व विकास में सहायक हो सकता है, लेकिन इसे केवल मनोरंजन या जुए के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने छात्रों को गेम खेलने के बजाय गेम निर्माता बनने और भारतीय संस्कृति एवं कथाओं पर आधारित खेल विकसित करने की सलाह दी।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षा बोझ नहीं लगनी चाहिए और उसमें पूर्ण भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने छात्रों को प्रतिदिन सोने से पहले अगले दिन के कार्यों की सूची बनाने और दिन के अंत में आत्ममंथन करने की सलाह दी।

    कार्यक्रम के दौरान सिक्किम की छात्रा श्रिया प्रधान ने हिंदी, नेपाली और बंगाली भाषाओं में स्वरचित गीत प्रस्तुत किया। प्रधानमंत्री ने असम के गमछा का उल्लेख करते हुए उसे नारी सशक्तीकरण और पूर्वोत्तर की कारीगरी का प्रतीक बताया। प्रधानमंत्री ने सभी छात्रों को कार्यक्रम की शुरुआत में असम का गमछा भेंट किया।

    प्रधानमंत्री ने छात्रों से विकसित भारत के निर्माण में भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि वर्ष 2047 में यही छात्र देश की सबसे सक्रिय पीढ़ी होंगे और उन्हें अभी से उसके लिए तैयारी करनी चाहिए।

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    shivam kumar

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