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    Home»अन्य खबर»इतिहास के पन्नों में 22 मईः अपराजेय है कालिंजर का किला, चढ़ाई में यहीं हुई थी शेरशाह की मौत
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    इतिहास के पन्नों में 22 मईः अपराजेय है कालिंजर का किला, चढ़ाई में यहीं हुई थी शेरशाह की मौत

    adminBy adminMay 21, 2024Updated:May 21, 2024No Comments6 Mins Read
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    देश-दुनिया के इतिहास में 22 मई की तारीख तमाम अहम वजह से दर्ज है। इस तारीख का महत्व उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में स्थित कालिंजर दुर्ग से है। कालिंजर का यह किला समुद्र की सतह से 1230 फीट की ऊंचाई पर बना हुआ है। इतिहासकारों का मानना है कि शेरशाह सूरी ने बीर सिंह बुंदेला को पकड़ने के लिए वर्ष 1544 में इस किले पर घेरा डाला था। तब इस किले पर कालिंजर के राजा कीरत सिंह रहते थे। उन्होंने बुंदेला को सौंपने से इनकार कर दिया था। शेरशाह ने किले को घेर कर सुरंगें और ऊंची मीनारें बनवाना शुरू कर दीं। जब सारी तैयारी पूरी हो गई तो तय हुआ कि 22 मई, 1545 को किले पर हमला बोला जाएगा। हमले में हिस्सा लेने के लिए शेरशाह खुद आगे आ गया।

    कुछ इतिहासकार मानते हैं कि शेरशाह ने बम के पलीते में आग लगा कर सैनिकों को उन्हें किले के अंदर फेंकने का आदेश दिया। अचानक एक बम किले की दीवार से टकरा कर वापस लौटा और उस स्थान पर फटा जहां बाकी बम और पटाखे रखे हुए थे। इससे जोरदार विस्फोट हुआ शेरशाह बुरी तरह झुलस गया। हालांकि उसके सैनिक किले में घुसने में कामयाब हो गए पर शेरशाह ने दम तोड़ दिया। कहते हैं कि शेरशाह की मौत के पांचवें दिन उसका दूसरे नंबर का बेटा जलाल खां कालिंजर पहुंचा। उसे हिंदुस्तान के बादशाह की गद्दी पर बैठाया गया। शेरशाह को कालिंजर के पास लालगढ़ में दफना दिया गया। बाद में उसके पार्थिव शरीर को वहां से निकाल कर सासाराम ले जाया गया। वहां शेरशाह का मकबरा बनवाया गया।

    जिला बांदा की वेबसाइट इसे अपराजेय किला बताया गया है। इसमें उपलब्ध विवरण के अनुसार, कालिंजर पहाड़ी की चोटी पर स्थित इस किले में अनेक स्मारकों और मूर्तियों का खजाना है। इन चीजों से इतिहास के विभिन्न पहलुओं का पता चलता है। चंदेलों ने इस किले का निर्माण कराया। यह किला चंदेल वंश के शासनकाल की भव्य वास्तुकला का उदाहरण है। इस किले के अंदर कई भवन और मंदिर हैं। इस विशाल किले में भव्य महल और छतरियां हैं, जिन पर बारीक डिजाइन और नक्काशी की गई है। किला हिन्दू भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है। किले में नीलकंठ महादेव का एक अनोखा मंदिर भी है।

    इतिहास के उतार-चढ़ावों का प्रत्यक्ष गवाह बांदा जनपद का कालिंजर किला हर युग में विद्यमान रहा है। इस किले के नाम अवश्य बदलते गए हैं। इसने सतयुग में कीर्तिनगर, त्रेतायुग में मध्यगढ़, द्वापर युग में सिंहलगढ़ और कलियुग में कालिंजर के नाम से ख्याति पाई है। कालिंजर का अपराजेय किला प्राचीन काल में जेजाकभुक्ति साम्राज्य के अधीन था। जब चंदेल शासक आए तो इस पर महमूद गजनवी, कुतुबुद्दीन ऐबक और हुमायूं ने आक्रमण कर इसे जीतना चाहा, पर कामयाब नहीं हो पाए। अंत में अकबर ने 1569 ईस्वी में यह किला जीतकर बीरबल को उपहार स्वरूप दे दिया। बीरबल के बाद यह किला बुंदेल राजा छत्रसाल के अधीन हो गया। इनके बाद किले पर पन्ना के हरदेव शाह का कब्जा हो गया। 1812 ईस्वी में यह किला अंग्रेजों के अधीन हो गया।

    कालिंजर किले और आसपास के मुख्य आकर्षणों में नीलकंठ मंदिर है। इसे चंदेल शासक परमादित्य देव ने बनवाया था। किले में स्थित इस मंदिर में 18 भुजा वाली विशालकाय प्रतिमा के अलावा रखा शिवलिंग नीले पत्थर का है। मंदिर के रास्ते पर भगवान शिव, काल भैरव, गणेश और हनुमान की प्रतिमाएं पत्थरों पर उकेरी गई हैं। इतिहासवेत्ता कहते हैं कि यहां शिव ने समुद्र मंथन के बाद निकले विष का पान किया था। शिवलिंग की खासियत यह है कि उससे पानी रिसता रहता है। इसके अलावा सीता सेज, पाताल गंगा, पांडव कुंड, बुड्ढा-बुड्ढी ताल, भगवान सेज, भैरव कुंड, मृगधारा, कोटितीर्थ, चौबे महल, जुझौतिया बस्ती, शाही मस्जिद, मूर्ति संग्रहालय, वाऊचोप मकबरा, रामकटोरा ताल, भरचाचर, मजार ताल, राठौर महल, रानीनिवास, ठा. मतोला सिंह संग्रहालय, बेलताल, सगरा बांध, शेरशाह सूरी का मकबरा व हुमायूं की छावनी आदि हैं।

    महत्वपूर्ण घटनाचक्र

    1420ः आस्ट्रिया और सीरिया से यहूदियों को निकाला गया।

    1545ः कालिंजर दुर्ग पर चंदेलों से युद्ध करते हुए शेरशाह सूरी की मौत।

    1805ः गवर्नर जनरल लार्ड वेलेजली ने एक आदेश के तहत दिल्ली के मुगल बादशाह के लिए एक स्थायी प्रावधान की व्यवस्था की।

    1915ः प्रथम विश्व युद्ध के दौरान इटली ने आस्ट्रिया, हंगरी और जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा की।

    1947ः ट्रूमन दस्तावेज पर हस्ताक्षर। इसमें अमेरिका ने शीत युद्ध में तुर्किये और यूनान की सहायता के लिए 400 मिलियन डालर का प्रावधान किया था।

    1947ः चार्ल्स डिकिंस के उपन्यास पर बनी डेविड लिंस की फिर्म ग्रेट एक्सपेक्टेशन्स अमेरिका में प्रदर्शित हुई। समीक्षक इसे डिकिंस के उपन्यासों पर बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्म मानते हैं।

    1949ः पश्चिम जर्मनी संविधान को अंगीकार करने के बाद औपचारिक रूप से अस्तित्व में आया।

    1972ः पाकिस्तान का राष्ट्रमंडल की सदस्यता से त्यागपत्र।

    1977ः बेनिन ने संविधान को अंगीकार किया।

    1984ः बछेन्द्री पाल दुनिया की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट को फतह करने वाली पहली भारतीय महिला बनी।

    1990ः उत्तरी एवं दक्षिणी यमन के विलय के साथ संयुक्त यमन गणराज्य का अभ्युदय।

    1992ः बोस्निया, स्लोवेनिया और क्रोएशिया संयुक्त राष्ट्र संघ के सदस्य बने।

    1996ः माइकल कैमडेसस तीसरी बार अगले पांच वर्ष के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रबंध निदेशक चुने गए।

    2001ः दलाई लामा ने तिब्बत की आजादी की मांग छोड़ी।

    2002ः नेपाल संसद भंग।

    2003ः अल्जीरिया में भूकंप। दो हजार से भी अधिक लोग मारे गये।

    2007ः गणितज्ञ श्रीनिवास वर्धन को नार्वे का अबेल पुरस्कार।

    2008ः संयुक्त राष्ट्र संघ की 47 सदस्यीय मानवाधिकार समिति में पाकिस्तान को शामिल किया गया।

    2009ः भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति रोह मू ह्यून ने आत्महत्या की।

    2010ः सैन डियागो (अमेरिका) के डॉ. क्रेग वेंटर के नेतृत्व वाली वैज्ञानिकों की 24 सदस्यीय टीम ने प्रयोगशाला में कृत्रिम जीवन बनाने में सफलता पाई।

    2010ः पाकिस्तान के मोहम्मद खेल गांव में आतंकवादियों के ठिकानों पर अमेरिकी ड्रोन हमले में दो विदेशियों सहित 10 तालिबान आतंकी मारे गए।

    2010ः मध्य इराक के खालेस शहर के बाजार में हुए कार बम धमाके में 23 लोग मारे गए।

    जन्म

    1772 धार्मिक और सामाजिक विकास में अग्रणी राजा राममोहन राय।

    1925ः हिंदी और रूसी साहित्य के आधुनिक सेतु निर्माताओं में से एक मदन लाल मधु।

    1959ः जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती।

     

    निधन

    1991ः प्रमुख वामपंथी नेता श्रीपाद अमृत डांगे।

    2000ः गोदरेज समूह के अध्यक्ष सोहराब फिरोजशाह गोदरेज।

    महत्वपूर्ण दिवस

    -विश्व जैव विविधता दिवस।

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