हाल में हुए रेल हादसों पर गंभीरता दिखाते हुए रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने इस्तीफे की पेशकश कर दी है। वहीं, इन दिनों झारखंड में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि हर दिन एक-दो मौतें ऐसी हो रही हैं, जिनमें स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और कर्तव्यहीनता स्पष्ट दिखती है। हर माह स्वास्थ्य विभाग से संबंधित दर्जनों ऐसी घटनाएं घट रही हैं, जिनसे पूरा राज्य शर्मसार होता रहा है। मानवता शर्मसार होती रही है। बावजूद इसके राज्य के स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती। ऐसी घटनाओं पर गंभीरता दिखाना तो दूर वह गैर जिम्मेदाराना बयान देकर सरकार की किरकिरी करा रहे हैं। पिछले दिनों खून की कमी और लापरवाही के कारण गुमला में जच्चा-बच्चा की मौत हो गयी। बीते मंगलवार को सड़क पर ही प्रसव का मामला सामने आया।
इधर, बुधवार को राजधानी स्थित राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में लापरवाही से एक गर्भवती को खून की बजाय पानी चढ़ाने से महिला की मौत हो गयी। वह भी तब जब मंत्री दिन में बारह बजे रिम्स का निरीक्षण कर और निर्देश पिलाकर गये थे। उनके निरीक्षण के मात्र 18 घंटे बाद ही लापरवाही से महिला की मौत हो गयी। दो दिन पहले एक पिता के पास 50 रुपये नहीं होने के कारण रिम्स में बच्चे की पैथोलॉजी जांच नहीं हो सकी और अंतत: उस बच्चे की मौत हो गयी। पिछले दिनों अस्पताल में शव वाहन नहीं मिलने से शवों को कंधे पर ढोकर ले जाने की दो-तीन घटनाएं सामने आयी थीं, जिनसे स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था की पोल खुल गयी थी। स्वास्थ्य मंत्री आये दिन सार्वजनिक कार्यक्रमों में स्वास्थ्य सुविधाओं का बखान करते रहते हैं, जबकि हकीकत इसके बिल्कुल अलग है। एजी रिपोर्ट ने भी स्पष्ट कहा है कि स्वास्थ्य विभाग अपना काम सही ढंग से नहीं कर रहा है। स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए बजट में वृद्धि के बावजूद स्वास्थ्य सुविधाओं पर लोक व्यय में विभाग जीएसडीपी के 2-3 प्रतिशत के लक्ष्य को प्राप्त करने में असफल रहा है। रामचंद्र चंद्रवंशी के अब तक के कार्यकाल में स्वास्थ्य विभाग में गड़बड़ियां ही गड़बड़ियां हुई हैं। दरअसल स्वास्थ्य मंत्री का पूरा फोकस अपने निजी अस्पताल पर है। राज्य की सवा तीन करोड़ जनता भगवान भरोसे है। जनता स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए त्राहिमाम कर रही है, लेकिन मंत्री जी को इससे कोई मतलब नहीं है।
परिजनों ने लगाया डॉक्टर और नर्स पर लापरवाही का आरोप
राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में लापरवाही ने एक और जान ले ली। लापरवाही ऐसी कि कुपोषण से पीड़ित एक गर्भवाती महिला को खून की जगह पानी चढ़ा दिया गया। नतीजा हुआ कि सुबह होते-होते महिला ने दम तोड़ दिया। इससे नाराज परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। इतना ही नहीं, मृतक महिला के पति लापरवाह डॉक्टर और चिकित्साकर्मियों के खिलाफ बरियातू थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने पर आमदा थे, पर अस्पताल प्रबंधन ने इस लापरवाही के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया, तब वे शांत हुए।
रात भर दौड़ाया गया विभाग से इमरजेंसी और इमरजेंसी से विभाग
मामला डॉ जेके मित्रा की यूनिट का है। बताया जा रहा है कि गुमला से आयी गर्भवती महिला रोमी देवी को बीते मंगलवार को ही रिम्स लाया गया था। शरीर में खून की कमी होने के कारण उसे रिम्स रेफर किया गया था। उसके पति प्रमोद ने बताया कि शाम में इमरजेंसी से उन्हें स्री एवं प्रसूती रोग विभाग भेजा गया। वहां गये, तो कोई देखने और सुननेवाला नहीं था। इसी में घंटे दो घंटे निकल गये। इसके बाद उन्हें कुछ और कागजात के लिए इमरजेंसी भेजा गया। वहां से कागजात दुरुस्त करा कर वापस चौथी मंजिल पर स्थित विभाग पहुंचे, तो कहा गया कि ड्यूटी चेंज होने के बाद देखते हैं।
फिर ड्यूटी चेंज होने के बाद उन्हें बताया गया कि यह इस विभाग का मामला नहीं है। अभी टाइम नहीं हुआ है। तब पुन: वह इमरजेंसी आये, तो उन्हें मेडिसीन डिपार्टमेंट में डॉ जेके मित्रा की यूनिट में भेजा गया। यहां लेकर आये तो जो आता वही पूछता कि लेबर डिपार्टमेंट का मामला यहां क्यों आ गया। तब उन्होंने बताया कि अभी काफी समय बाकी है। खून की कमी के कारण चक्कर आ रहा है मरीज को। तब एक जूनियर डॉक्टर ने देखा और खून चढ़ाने को कहा। वह खून के चक्कर में भाग दौड़ कर रहे थे। तब तक नर्सों ने स्लाइन चढ़ाना शुरू कर दिया। इसी बीच उन्होंने खून की व्यवस्था भी कर ली। पर नर्स स्लाइन ही चढ़ाती रही। उन्होंने विभाग से लेकर इमरजेंसी और डॉक्टरों को इसकी जानकारी दी, पर किसी ने नहीं सुनी। अंतत: सुबह होते-होते उनकी पत्नी ने दम तोड़ दिया।