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    Home»दुनिया»भारत का हेग समझौते पर हस्ताक्षर न करना एक गंभीर मुद्दा: जस्टर
    दुनिया

    भारत का हेग समझौते पर हस्ताक्षर न करना एक गंभीर मुद्दा: जस्टर

    आजाद सिपाहीBy आजाद सिपाहीOctober 5, 2017No Comments3 Mins Read
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    वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा भारत में अमेरिका के अगले राजदूत के रूप में नामांकित किए गए केनेथ जस्टर ने कहा कि मां या पिता द्वारा बच्चे के अपहरण से संबंधित हेग समझौते पर भारत द्वारा हस्ताक्षर न करना बेहद गंभीर मुद्दा है। अंतरराष्ट्रीय बाल अपहरण के नागरिक पहलुओं से जुड़े हेग समझौते (1980) पर 96 देशों ने हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत अपह्रत बच्चे को लौटाए जाने की व्यवस्था मुहैया की गई है जिसे किसी एक अभिभावक द्वारा मूल देश से दूसरे देश ले जाया गया हो।

    सीनेट विदेश संबंध समिति के सामने केनेथ जस्टर की नियुक्ति की पुष्टि के लिए बहस के दौरान सांसद रॉब पोर्टमैन ने कहा कि भारत में अमेरिकी बच्चों के अपहरण के 80 ज्ञात मामले हैं। उन्होंने कहा कि इनमें से लगभग सभी मामले वैवाहिक झगड़ों के नतीजे हैं जिसमें किसी एक अभिभावक को भारत की अदालतों से बच्चों के संरक्षण की इजाजत प्राप्त हो जाती है।

    अमेरिकी परिदृश्य में इन्हें अपहरण का मामला माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि ये बच्चे जन्म से अमेरिकी नागरिक होते हैं। वैवाहिक मतभेदों के मामलों में किसी एक अभिभावक द्वारा बच्चे को वापस लौटाने की मांग करने वाले देशों की बात की जाए तो मैक्सिको के बाद भारत दूसरे स्थान पर है। पोर्टमैन ने कहा, भारत में अमेरिकी बच्चों के अपहरण के अबतक करीब 80 मामले सामने आ चुके हैं। यह हमारे संबंधों का हिस्सा है जिनपर मेरे विचार से ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया है।

    भारत ने अबतक अंतरराष्ट्रीय बाल अपरहण के वर्ष 1980 के हेग समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। उन्होंने कहा करीब 96 देश हैं जिन्होंने उसपर हस्ताक्षर किए हैं और भारत को भी इसपर हस्ताक्षर करने चाहिए। उन्होंने कहा कि इसका मूल मकसद इन बच्चों की निगरानी से जुड़े मतभेदों पर निर्णय प्रक्रिया को तेज करना है और अपहृत बच्चों को उनके उचित घरों में लौटाने में मदद करना है।

    जवाब में जस्टर ने कहा कि उनके लिए इससे ज्यादा कष्टदायक कोई बात नहीं कि एक अभिभावक का बच्चा अपह्रत हो जाए और वह उससे मिलने या मामले में कोई समाधान ढूंढ़ पाने में सक्षम न हो पा रहा हो। उन्होंने सांसदों से कहा, यह बेहद गंभीर मुद्दा है, हेग समझौते पर भारत सरकार एक हस्ताक्षरकर्ता नहीं है, मैं नहीं जानता कि उनके ऐसा करने की क्या वजह है लेकिन अगर मेरी नियुक्ति को मंजूरी मिल जाती है तो मैं यह मुद्दा निश्चित तौर पर उठाउंगा।

    अगर भारत इस समझौते में नहीं भी शामिल होता है तब भी जरूरी है कि व्यक्तिगत मामलों का पता लगाने और उनके समाधान के लिए कोई प्रक्रिया तय की जाएगी। जस्टर ने कहा, मैं उन लोगों से मिलना चाहता हूं जो इससे प्रभावित हैं और उनकी कहानियों को समझना और मामले में उनका पक्ष जानना चाहता हूं। यह महत्त्वपूर्ण होगा और मैं जानता हूं कि भारत में मिशन के लिए यह पहले से ही एक मुद्दा है।

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