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    Home»Top Story»पाक को झटकाः अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ने अंतिम फैसले तक जाधव की फांसी पर रोक लगाई
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    पाक को झटकाः अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ने अंतिम फैसले तक जाधव की फांसी पर रोक लगाई

    आजाद सिपाहीBy आजाद सिपाहीMay 18, 2017No Comments4 Mins Read
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    अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने पाकिस्तानी सैन्य अदालत से जासूसी और विध्वंसक गतिविधियों के आरोप में मौत की सजा पाए भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव की मौत की सजा पर गुरुवार को रोक लगा दी।

    मौत नकी सजा के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र की सर्वोच्च न्यायिक संस्था में भारत के पक्ष को मजबूती देते हुए अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने पाकिस्तान को निर्देश दिया कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए कि उसके (अंतरराष्ट्रीय न्यायालय) द्वारा अंतिम फैसला सुनाये जाने तक जाधव को फांसी न दी जाए। न्यायालय के अध्यक्ष रोनी अब्राहम ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि 11 न्यायाधीशों की पीठ ने एकमत से यह फैसला लिया है।

    न्यायालय ने कहा कि वियना संधि के मुताबिक भारत को उसके नागरिक से दूतावास संपर्क की इजाजत दी जानी चाहिए। भारत और पाकिस्तान दोनों ही 1977 में वियना संधि पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। पूर्व भारतीय नौसेना अधिकारी के मामले के अपने न्यायक्षेत्र में होने पर जोर देते हुए न्यायालय ने कहा कि जिन परिस्थितियों में 46 वर्षीय जाधव को गिरफ्तार किया गया वे विवाद के दायरे में हैं। भारत और पाकिस्तान द्वारा इस मामले में अपनी-अपनी दलीलें दिए जाने के तीन दिन बाद यह फैसला आया है।

    पाकिस्तान का दावा है कि उसके सुरक्षाबलों ने जाधव को पिछले साल 3 मार्च को अशांत बलूचिस्तान प्रांत से गिरफ्तार किया था जहां वह कथित तौर पर ईरान से दाखिल हुआ था। भारत हालांकि कहता रहा है कि जाधव को ईरान से गिरफ्तार किया गया जहां नौसेना से सेवानिवत्ति के बाद वह कारोबार के सिलसिले में थे। जाधव का मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का नया केंद्रबिंदु है।

    भारत ने आठ मई को दूतावासीय संबंधों पर वियना संधि के कथित उल्लंघन पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में दस्तक दी थी। 9 मई को वैश्विक अदालत ने अंतरिम उपाय के तहत मौत की सजा को स्थगित कर दिया था।

     

    अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ने कहा है कि कुलभूषण जाधव को काउंसलर एक्सेस मिलना चाहिए और आदेश नहीं मानने पर पाकिस्तान पर लगेगा प्रतिबंध कोर्ट ने कहा, संधि के तहत पाकिस्तान को काउंसलर एक्सेस मिलना चाहिए और पाक का जासूस का दावा साबित नहीं होता है। इतना ही नहीं जाधव की गिरफ्तारी एक विवादित मुद्दा है। कोर्ट ने कहा कि दोनों देश मानते हैं कि कुलभूषण जाधव भारतीय है। जस्टिस रोनी अब्राहम ने कहा कि भारत ने तय समय सीमा पर जाधव की फांसी के लिए अपील नहीं की।

     

    पाकिस्तान की दलील

    – भारत को कुलभूषण मामले को आईसीजे में लाने का अधिकार नहीं है, क्योंकि विएना संधि जासूसों, आतंकवादियों तथा जासूसी से जुड़े लोगों पर लागू नहीं होती।

    – कुरैशी ने यह भी कहा कि भारत ने इस साल जनवरी में पाकिस्तान के उस संपर्क का कोई जवाब नहीं दिया, जिसमें जाधव से संबंधित मामले की जांच के लिए उससे सहयोग मांगा गया था।

    भारत की दलील
    साल्वे ने जाधव की गिरफ्तारी, उसके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करने तथा मामले की सुनवाई से संबंधित तमाम कार्रवाई को विवेकशून्य तरीके से संयुक्त राष्ट्र के चार्टर तथा विएना संधि का उल्लंघन करार दिया था।

    – मनगढ़ंत आरोपों के संदर्भ में उन्हें अपना बचाव करने के लिए कानूनी सहायता मुहैया नहीं कराई गई।

    – साल्वे ने अदालत से कहा कि 16 मार्च, 2016 को ईरान में जाधव का अपहरण किया गया और फिर पाकिस्तान लाकर कथित तौर पर भारतीय जासूस के तौर पर पेश किया गया और सैन्य हिरासत में एक दंडाधिकारी के समक्ष उनसे कबूलनामा लिया गया।

    – जाधव से कोई संपर्क नहीं करने दिया गया और सुनवाई भी एकतफा की गई।

    पाकिस्तान आर्मी कोर्ट का फैसला

    – पाकिस्तान की आर्मी कोर्ट ने जाधव को ‘वन मैन डिमॉलिशन स्क्वॉड’ बताते हुए 10 अप्रैल को फांसी की सजा सुनाई।
    – आरोप-पत्र में कुलभूषण पर लगाए गए आरोपों में उन्हें हॉलीवुड फिल्मों के कैरेक्टर ‘रैंबो’ की तरह पेश किया गया है, जो पाइपलाइनों में ब्लास्ट करता है, कैंपों में IEDs प्लांट करता है और तमाम तरह की विध्वंसक गतिविधियों को अंजाम देता है।

    – ग्वादर, तुरबत में हुए हमलों को स्पॉन्सर करना। जिवानी बंदरगाह पर बोट और रेडार स्टेशन पर हमले।

    – बलूचिस्तान में पाकिस्तानी युवकों को भड़काने के लिए अलगाववादी और आतंकी तत्वों की वित्तीय सहायता दी। बलूचिस्तान के सूई इलाके में गैस पाइपलाइनों में धमाके कराए।

    – 2015 में क्वेटा में हुए धमाकों को स्पॉन्सर किया। इसमें जान-माल को काफी नुकसान पहुंचा। क्वेटा के हजरास और शिया श्रद्धालुओं पर हमले भी कराए।

    – 2014-15 तुरबत, पंजगुर, ग्वादर, पसनी और जिवानी में राज्य विरोधी तत्वों की मदद से हमले किए। कई सिविलियन और सैनिक मारे गए और घायल हुए।

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