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    Home»Top Story»साझा डिक्लेरेशन भारत की कूटनीतिक जीत: पीएम मोदी के पर्सनल इक्वेशन के कारण बनी सहमति
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    साझा डिक्लेरेशन भारत की कूटनीतिक जीत: पीएम मोदी के पर्सनल इक्वेशन के कारण बनी सहमति

    azad sipahi deskBy azad sipahi deskSeptember 10, 2023No Comments5 Mins Read
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    नयी दिल्ली। भारत शनिवार को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक जीत दर्ज करते हुए, सभी सदस्य देशों की सहमति के साथ ‘नयी दिल्ली लीडर्स समिट डिक्लेरेशन’ स्वीकार कराने में कामयाब हो गया। हालांकि इसके लिए पीएम मोदी को अपने पर्सनल इक्वेशन का इस्तेमाल करना पड़ा। यूक्रेन के मुद्दे पर सहमति बनाने में भारत को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। शुक्रवार रात तक सदस्य देश इस पर सहमत नहीं हो सके थे।

    सूत्रों के अनुसार 3 से 6 सितंबर को नूंह (हरियाणा) में हुई जी 20 शेरपा मीट में सदस्य देशों के शेरपाओं के बीच यूक्रेन युद्ध को लेकर काफी गर्मा-गर्मी हो गयी थी। उसके बाद भारत के अधिकारियों ने दिल्ली वापस आकर यूक्रेन युद्ध पर एक नया पैराग्राफ बनाया, जिस पर सदस्य देशों की राय ली गयी।

    भारत ने अपनी तरफ से यह दलील दी कि यूक्रेन युद्ध को सिर्फ एक मुद्दे के रूप में नहीं देखना चाहिए, क्योंकि इसके कारण और महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी सहमति नहीं बन पा रही है।

    शुक्रवार रात तक खेमों में बंटे हुए थे देश
    शनिवार को विभिन्न देशों के प्रतिनिधि सुबह 10.30 से 1.30 बजे तक ‘वन अर्थ ‘ के तहत मिले और उन्होंने 5 मिनट के समय में अपनी बात रखी। दोपहर 3.30 बजे यह खबर आयी कि नयी दिल्ली डिक्लरेशन, जिसमें 83 पैराग्राफ हैं, को सभी देशों ने अपनी सहमति दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत मंडप में शिखर सम्मेलन के दूसरे सत्र को संबोधित करते हुए इसकी जानकारी दी ।

    आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार रात तक सदस्य देश एक सर्वसम्मत घोषणा पर तैयार नहीं हो पाये थे और ऐसा लग रहा था कि एक साझा डिक्लरेशन के आने की संभावना कम है। सूत्रों के अनुसार यूक्रेन में हो रहे युद्ध को लेकर सदस्य देश दो खेमे में बंटे हुए थे। इसके एक तरफ अमेरिका और उसके सहयोगी देश थे और दूसरी तरफ रूस और चीन थे।

    मोदी ने समझाया कि जी20 एक इकॉनॉमिक फोरम है
    सूत्रों के अनुसार बात बनती न देख, पीएम मोदी और भारत के अधिकारियों ने बाकी देशों को यह समझाया कि जी20 एक इकॉनॉमिक फोरम है न की भू-राजनीतिक मुद्दों को सुलझाने का फोरम। यूक्रेन युद्ध को ही जी20 का इकलौता मसौदा नहीं बनना चाहिए। इस बात का समर्थन ब्राजील, साउथ अफ्रीका और इंडोनेशिया ने भी किया, जिसके बाद अन्य राष्ट्र एक साझा डिक्लेरेशन के लिए तैयार हुए। बाद में इस बात की पुष्टि विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी की।

    सूत्रों के अनुसार पीएम मोदी ने शनिवार को कई बार जटिल मुद्दों को सुलझाने के लिए अन्य देशों के नेताओं से अपने व्यक्तिगत इक्वेशन का इस्तेमाल किया। इसके कारण बात धीरे-धीरे आगे एक सहमति की तरफ बढ़ती रही।

    मोदी ने जापान, इटली जर्मनी के नेताओं से अकेले में बात की
    शनिवार दोपहर को 1.30 बजे के बाद, मोदी ने ब्रिटेन, जापान , इटली और जर्मनी के नेताओं से अकेले में बात की।

    विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यूक्रेन युद्ध के काले बादल नई दिल्ली में हो रहे जी20 समिट पर उलटा असर डाल रहे थे। शुक्रवार शाम तक भारत खेमे में एक मायूसी का माहौल था। कल रात तक 38 पन्नों के ड्राफ्ट डिक्लेरेशन पर भी सहमति नहीं बन पायी थी।

    जी20 समिट के आखिरी दिन मेजबान देश की यह कोशिश रहती है कि एक साझा डिक्लेरेशन पर सभी सदस्य देश सहमति बना लें। अगर सहमति नहीं बन पाती है, तो इसे एक नाकामी के रूप में देखा जाता है।

    अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, जापान और स्पेन ने रूस को कोसा
    सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, जापान और स्पेन ने एक स्वर में यूक्रेन पर हमला करने का आरोप रूस पर लगाया और दुनिया अन्न और ऊर्जा उत्पादन की कमी के लिए जिम्मेदार ठहराया।

    किशिदा बोले- रूस का परमाणु हमले की धमकी देना गलत
    जापान के प्रधानमंत्री फ्यूमियो किशिदा ने कहा कि रूस के कारण ग्लोबल इकॉनॉमी पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है और जी 20 सदस्यों को इसका संज्ञान लेते हुए रूस पर अपने सैनिकों को वापस बुलाने का दबाव बनाना चाहिए। जापान ने रूस के यूक्रेन के खिलाफ परमाणु बम इस्तेमाल करने की धमकी की भी आलोचना की।

    सर्गेई लावरोव- यूक्रेन ने रूस के साथ ट्रीटी तोड़ी
    रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अपनी बारी आने पर बाकी देशों की आलोचना को बेबुनियाद बताया और कहा कि यूक्रेन ने रूस के साथ अपनी ट्रीटी (संधि) को तोड़ा, जिसके कारण आज यह माहौल बना है। लावरोव के अनुसार, इस काम में यूक्रेन को काफी सारे जी20 सदस्य देशों से मदद मिली।

    डिक्लरेशन में रूस की आलोचना नहीं
    सूत्र ने बताया कि 83 पैराग्राफ वाले डिक्लरेशन में रूस की कहीं पर भी आलोचना नहीं हुई है। साझा डिक्लेरेशन​​​​​ में सब मुद्दों पर बात की है। यूक्रेन युद्ध पर भी एक पूरा पन्ना है। हमारा आॅब्जेक्टिव था कि सब मुद्दों पर बात हो, सबकी बात सुनी जाये और सदस्य देश एक दूसरे से खुल कर बात करें। इसी आॅब्जेक्टिव के तहत हमने काम किया, जिसका नतीजा यह निकला कि सारे देश एक कन्सेंसस पर आ गये।

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