रांची। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नीतियों को लेकर विपक्ष की ओर से लगातार झूठ और भ्रामक प्रचार किया जा रहा है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज ने मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के दिए गए बयान पर गहरी आपत्ति जताई है, जिसमें उन्होंने भाजपा पर अल्पसंख्यकों और आदिवासियों के अधिकारों के हनन का आरोप लगाया है। यह बयान तथ्यों से परे और भ्रामक है, जो समाज में अनावश्यक भय और भ्रम फैलाने का प्रयास करता है। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों और आदिवासियों को कांग्रेस गुमराह न करे।
राफिया ने शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि आज कांग्रेस आदिवासी समुदाय के हितों की बात कर रही है, जो हास्यपद है। कांग्रेस ने तो एक आदिवासी बेटी जो देश के सर्वोच्च पद पर बैठी है राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के राष्ट्रपति बनने के ख़िलाफ़ थे और कई अपशब्द कहने से भी पीछे नहीं रहे थे। इसके अलावा, झारखंड में पेसा कानून अभी तक लागू नहीं किया गया है, जिससे आदिवासी समुदाय को उनके अधिकारों से वंचित रखा गया है।
साथ ही, कांग्रेस पार्टी सरना धर्म कोड की बात करती है जबकि केंद्र की मनमोहन सिंह सरकार ने इसके खिलाफ निर्णय लिए थे। यहां तक कांग्रेस उस पार्टी राजद से हाथ मिला कर बैठी है जिसके प्रमुख झारखंड अलग राज्य के विरोध में थे और कहा करते थे कि झारखंड मेरी लाश पर बनेगा। यहां तक रांची सिरम टोली स्थित सरना स्थल की समस्या का समाधान भी कांग्रेस से नहीं हो पा रहा।
राफिया ने कांग्रेस से सवाल किया कि जब 1994,1995 और 2013 मे कांग्रेस की ओर से तीन बार वक़्फ़ बोर्ड का संशोधन किया तब क्या ये लोकतंत्र या अल्पसंख्यक विरोधी नहीं था। भाजपा सरकार चाहती है की वक्फ बोर्ड संशोधन के जरिये की वक्फ संपत्ति को भू-माफियाओं और लुटेरों के चंगुल से मुक्त हो तथा गरीब मुसलमानों के हित में इस्तेमाल हो। लेकिन कुछ लोग इसे गरीब मुसलमानों के हित में इस्तेमाल करने की बजाय भू-माफियाओं की कठपुतली बनकर काम कर रहे हैं। यह दुखद है,कांग्रेस को गरीब मुसलमानों की चिंता करनी चाहिए ।
उन्होंने कहा जो विधेयक लाया जा रहा है वह सच्चर समिति की रिपोर्ट (जिसमें सुधार की बात कही गई थी) पर आधारित है जिसे कांग्रेस ने बनाया था। इस विधेयक से किसी भी धार्मिक संस्था की स्वतंत्रता में कोई हस्तक्षेप नहीं होगा। किसी के अधिकार छीनने की बात तो भूल ही जाइए।
राफिया ने कहा यह विधेयक रिफार्म के लिए है, रिवोल्ट के लिए नहीं। यह बिल गरीब मुस्लिमों और महिलाओं के अधिकारों को भी सुनिश्चित करेगा।