गोड्डा। गोड्डा जिले के डकैता स्थित फूलों झानो राजा राज विद्यालय आज गंभीर वित्तीय संकट के दौर से गुजर रहा है। कभी पहाड़िया और आदिवासी समुदाय के करीब 300 बच्चों के लिए निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की किरण बना यह विद्यालय अब संसाधनों के अभाव में अपने अस्तित्व को बचाने की जद्दोजहद कर रहा है। इस संकट का सीधा असर यहां पढ़ने वाले मासूम बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर पड़ रहा है।
इस विद्यालय की स्थापना दिवंगत सामाजिक और स्थानीय नेता सूर्यनारायण हांसदा ने इस सोच के साथ की थी कि आर्थिक रूप से कमजोर, अनाथ और वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा का समान अवसर मिल सके। उनके नेतृत्व में विद्यालय ने कई वर्षों तक आदिवासी बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़े रखा। लेकिन उनके असामयिक निधन के बाद विद्यालय की आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे कमजोर होती चली गई। वर्तमान में हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि बच्चों के भोजन, कॉपी-किताब, यूनिफॉर्म और शिक्षकों के मानदेय तक की व्यवस्था करना कठिन हो गया है।
बुधवार को विद्यालय परिसर में बच्चों को संबोधित करते हुए स्व. हांसदा की माता नीलमणि मुर्मू भावुक हो उठीं। उन्होंने कहा कि उनके पुत्र के निधन के बाद कई जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने विद्यालय को सहयोग देने का भरोसा दिलाया था, लेकिन आज तक कोई ठोस मदद नहीं मिल सकी। उन्होंने चिंता जताई कि लगातार अनदेखी के कारण बच्चों का मनोबल टूट रहा है।
विद्यालय के प्रधानाचार्य सुनील टुडू ने बताया कि आर्थिक संकट के कारण शिक्षकों को समय पर मानदेय नहीं मिल पा रहा है, जिससे पढ़ाई व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि जल्द ही अभिभावकों की बैठक बुलाकर आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा।
ग्राम प्रधान निर्माणी मुर्मू ने विद्यालय को अपने पुत्र के सपनों की धरोहर बताते हुए समाज और प्रशासन से सहयोग की अपील की। उन्होंने उम्मीद जताई कि न्यायिक प्रक्रिया के पूर्ण होने के बाद विद्यालय को फिर से मजबूती मिलेगी।
परीक्षा का समय नजदीक है और ऐसे में इस संकट ने बच्चों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। यह विद्यालय केवल एक इमारत नहीं, बल्कि सैकड़ों गरीब और आदिवासी बच्चों के सपनों का सहारा है, जिसे बचाना समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है।

