रांची। झारखंड में करोड़ों रुपये के जीएसटी (GST) घोटाले ने पूरे देश में हलचल मचा दी है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की गहन जांच में खुलासा हुआ है कि इस सिंडिकेट के तार झारखंड से लेकर पश्चिम बंगाल, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर तक फैले हुए हैं। ईडी ने इसे देश की अर्थव्यवस्था के खिलाफ एक सुनियोजित आर्थिक साजिश करार दिया है।
14 हजार फर्जी बिल और 800 करोड़ का खेल जांच एजेंसी के अनुसार, इस घोटाले की जड़ें फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के अवैध लाभ से जुड़ी हैं। रांची जोनल कार्यालय ने इस मामले में जमशेदपुर के कारोबारी विक्की भालोटिया उर्फ अमित अग्रवाल समेत कोलकाता के अमित गुप्ता, सुमित गुप्ता और शिवकुमार देवड़ा को पहले ही गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों ने मिलकर केवल झारखंड में ही 14,000 से अधिक फर्जी बिलों के जरिए करीब 800 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी की है।
पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़ा कनेक्शन ईडी की ईटानगर टीम ने जांच के दौरान पाया कि अरुणाचल प्रदेश की एक फर्जी फर्म, मेसर्स सिद्धि विनायक ट्रेड मर्चेंट, के नाम पर बिना किसी वास्तविक व्यापार के 15,000 फर्जी बिल जारी किए गए। इनका टैक्सेबल मूल्य 650 करोड़ रुपये से अधिक था। यह नेटवर्क इतना बड़ा है कि महज छह महीने में 11 राज्यों के 58 कारोबारियों को ये बिल जारी किए गए। इसी कड़ी में झारखंड के कारोबारी महेश प्रसाद गुप्ता के ठिकानों पर भी छापेमारी की गई है।
डिजिटल साक्ष्यों और दस्तावेजों की जांच के बाद ईडी का मानना है कि इस ‘कागजी कंपनियों’ के खेल में अभी कई बड़े रसूखदार चेहरों के नाम सामने आना बाकी हैं।

