रांची। स्वास्थ्य विभाग के आयुष निदेशालय में कार्य आवंटन और भुगतान प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। निजी कंपनियों को दिए गए करोड़ों रुपये के कार्य और उनके भुगतान में हो रही देरी ने पूरे मामले को विवादों में ला दिया है। जानकारी के अनुसार, Bitsphere Infosystem Pvt. Ltd. और Team Zoom Services Pvt. Ltd. को अप्रैल से जून 2023 के बीच विभिन्न कार्यों का जिम्मा दिया गया था, जिसे कंपनियों ने तय समय सीमा में पूरा कर लिया।
कंपनियों ने जुलाई 2023 में अपने बिल जमा कर भुगतान की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन विभाग ने जांच का हवाला देते हुए भुगतान रोक दिया। इसके बाद से मामला लगातार लंबित बना हुआ है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जांच के नाम पर अब तक चार समितियों का गठन किया जा चुका है, लेकिन किसी भी समिति ने अंतिम निष्कर्ष प्रस्तुत नहीं किया।
पहली जांच समिति 29 जुलाई 2024 को स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी के परियोजना निदेशक पवन कुमार की अध्यक्षता में बनाई गई थी। इसके बाद 23 दिसंबर 2024 को संयुक्त सचिव ललित मोहन शुक्ला की अध्यक्षता में दूसरी समिति गठित हुई। तीसरी समिति 27 फरवरी 2025 को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक अबु इमरान के नेतृत्व में बनी।
तीसरी समिति ने 9 मई 2025 को अपनी रिपोर्ट भी सौंपी, लेकिन उस पर आपत्ति जताते हुए विभाग ने 18 सितंबर 2025 को पूरक रिपोर्ट मांगी, जो अब तक नहीं मिल पाई है। अब विभाग इस पूरे मामले में चौथी जांच समिति गठित करने की तैयारी कर रहा है।
लगातार जांच और निर्णयहीनता के कारण करोड़ों रुपये का भुगतान अटका हुआ है और जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

