रांची। वैश्विक संकट और चल रहे युद्ध को लेकर नरेंद्र मोदी ने 24 दिनों बाद संसद में प्रतिक्रिया दी, जिस पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने तीखी आलोचना की है। पार्टी के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने काफी देर से अपनी चुप्पी तोड़ी और उनका बॉडी लैंग्वेज यह संकेत दे रहा था कि वे दबाव में हैं।
उन्होंने कहा कि देश इस संकट की घड़ी में सरकार से स्पष्ट रणनीति और ठोस कदमों की अपेक्षा कर रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस दिशा नहीं दिख रही है। प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य में कहा कि भारत सभी पक्षों से लगातार बातचीत कर रहा है और विदेशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि ईरान से करीब 1000 छात्रों को वापस लाया गया है। हालांकि विपक्ष ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये छात्र युद्ध से पहले ही संस्थान बंद होने के कारण लौटे थे और इसमें सरकार की कोई विशेष भूमिका नहीं थी। साथ ही तेहरान और मस्कट में फंसे अन्य भारतीयों की वापसी को लेकर भी सरकार की योजना पर सवाल खड़े किये गये हैं।
सुप्रियो ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने अमेरिका और इजराइल की भूमिका पर कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है। उनका कहना है कि इस संकट का असर देश के भीतर भी दिखने लगा है होटल-रेस्टोरेंट बंद हो रहे हैं, मेनू सीमित किये जा रहे हैं और छात्र पढ़ाई छोड़कर घर लौट रहे हैं। झामुमो ने मांग की है कि सरकार संभावित लंबी अवधि के संकट को देखते हुए देश के सामने स्पष्ट रणनीति रखे और पारदर्शिता बनाए रखें, ताकि जनता का भरोसा कायम रह सके।

