वाशिंगटन: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के ऐतिहासिक आर्टेमिस II मिशन के चारों अंतरिक्ष यात्री पूरी तरह तैयार हैं। 53 साल बाद चंद्रमा की ओर जाने वाली यह पहली मानवयुक्त उड़ान 1 अप्रैल को फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से प्रक्षेपित होगी। कमांडर रीड वाइसमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन विशेषज्ञ क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसन ने कहा कि वे इस ऐतिहासिक पल के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
नासा के अनुसार, 49 घंटे और 40 मिनट की उलटी गिनती सोमवार 31 मार्च को भारतीय समयानुसार देर रात 4:44 बजे शुरू होगी। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो रॉकेट 1 अप्रैल को शाम 6:24 बजे पूर्वी डेलाइट समय में उड़ान भरेगा। कमांडर वाइसमैन ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उनकी टीम और रॉकेट दोनों पूरी तरह से तैयार हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी भी स्थिति, जैसे कि तकनीकी कारणों से प्रक्षेपण टलना, के लिए मानसिक रूप से 100 प्रतिशत तैयार हैं।
मिशन का उद्देश्य और यात्रा का विवरण
आर्टेमिस II मिशन का उद्देश्य 50 से अधिक वर्ष के बाद मनुष्य को फिर से चंद्रमा के करीब ले जाना है। यह 1972 के अपोलो 17 के बाद चंद्रमा की ओर जाने वाला पहला मानव मिशन है। यह चंद्रमा के चारों ओर एक “फ्लाईबाई” यानी परिक्रमा करेगा, लेकिन चंद्रमा की सतह पर नहीं उतरेगा। इसका मुख्य लक्ष्य भविष्य के आर्टेमिस III के लिए प्रणालियों का परीक्षण करना है।
यह लगभग 10 दिन की यात्रा होगी। चालक दल ओरियन कैप्सूल में यात्रा करेगा। यह मिशन नासा को अंतरिक्ष यात्रियों के साथ ओरियन के जीवन-सहायक प्रणालियों के परीक्षण करने की अनुमति देगा। चारों अंतरिक्ष यात्री शुक्रवार को ह्यूस्टन से केनेडी स्पेस सेंटर पहुंच चुके हैं। मेडिकल क्वारंटाइन में रहते हुए उन्होंने रविवार को एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए।
अंतरिक्ष यात्रियों का अनुभव और तैयारी
कमांडर रीड वाइसमैन 2019-20 में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर 328 दिनों के अभियान के दौरान छह बार स्पेस वॉक कर चुके हैं। उन्होंने कहा, “यह पहली बार है जब हम इंसानों को अपने साथ ले जा रहे हैं। यह सब सपने जैसा लगता है। मुझे आराम महसूस हो रहा है। यहां होना अच्छा लग रहा है।” पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन विशेषज्ञ क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसन भी इस मिशन के लिए वर्षों से तैयारी कर रहे हैं।
मौसम विज्ञानियों का कहना है कि मौसम के ठीक रहने की 80 प्रतिशत संभावना है। ग्राउंड सिस्टम मैनेजर शॉन क्विन ने कहा कि आर्टेमिस II मिशन 53 साल में चांद पर वापस जाने वाली पहली इंसानी उड़ान है। इस मिशन को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि लॉन्च होने के 25 घंटे बाद चांद की ओर रवाना होने से पहले, ओरियन क्रू कैप्सूल के प्रोपल्शन, नेविगेशन, कम्युनिकेशन और लाइफ सपोर्ट सिस्टम की अच्छी तरह से जांच की जा सके।
रिकॉर्ड तोड़ यात्रा और भविष्य की योजनाएं
चारों अंतरिक्ष यात्री न तो चांद पर उतरेंगे और न ही चंद्रमा की कक्षा में जाएंगे। इसके बजाय, वे चांद के दूसरी तरफ से घूमकर आएंगे। वे चांद की ग्रैविटी का इस्तेमाल करके कैप्सूल के रास्ते को वापस पृथ्वी की ओर मोड़ेंगे। 10 अप्रैल को रात लगभग आठ बजे पूर्वी समयानुसार सैन डिएगो के पास दक्षिणी कैलिफोर्निया के तट से दूर प्रशांत महासागर में कैप्सूल की लैंडिंग होगी।
अगर चारों बुधवार को दो घंटे की लॉन्च विंडो के शुरू होते ही उड़ान भरते हैं, तो वे पृथ्वी से इतनी दूर तक जाएंगे जितनी दूर तक उनसे पहले कोई भी इंसान नहीं गया है। वे 252,799 मील की दूरी तय करेंगे। यह 1970 में अपोलो 13 के क्रू के बनाए गए रिकॉर्ड से लगभग 4,144 मील ज्यादा है। इस मिशन को एक तरह से नई राह दिखाने वाला माना जा रहा है।
यह अगले साल पृथ्वी की कक्षा में होने वाली एक उड़ान के लिए जमीन तैयार करेगा। नासा की योजना है कि इस उड़ान के बाद, 2028 में चांद पर एक या दो लैंडिंग की जाएं। आर्टेमिस II मिशन मानव इतिहास में अंतरिक्ष यात्रा का एक नया अध्याय खोलेगा और भविष्य की अंतरिक्ष खोजों की नींव रखेगा।

