रांची। झारखंड में बढ़ते पर्यावरणीय संकट और मानव-हाथी संघर्ष की गंभीर स्थिति को लेकर अबुआ अधिकार मंच ने राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मिलकर ठोस पहल की मांग की है। अध्यक्ष गौतम सिंह के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को राजभवन पहुंचकर पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को बताया कि जलवायु परिवर्तन झारखंड के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल वेदांत कौस्तव ने बताया कि राज्यपाल ने सभी मुद्दों को गंभीरता से सुना। हाथी कॉरिडोर की आवश्यकता, मानव-हाथी संघर्ष की भयावह स्थिति और पर्यावरण संरक्षण में युवाओं की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। ज्ञापन में बताया गया कि झारखंड में हाथियों की मृत्यु दर और मानव हताहतों की संख्या गंभीर स्तर पर पहुंच गई है। इसके मुख्य कारण अवैध खनन, जंगलों की कटाई और हाथियों के पर्यावास का क्षरण हैं।
वर्तमान में राज्य में केवल 17 हाथी कॉरिडोर चिह्नित हैं, जबकि मुंबई की वाइल्ड लाइफ एंड बी प्रोटेक्शन फाउंडेशन ने इनकी संख्या बढ़ाकर 75 करने की सलाह दी है। प्रतिनिधिमंडल ने रामगढ़, धनबाद, बोकारो, जमशेदपुर, रांची और गिरिडीह जैसे शहरों में इस्पात, कोक और ताप संयंत्रों से फैल रहे जहरीले धुएं पर भी चिंता जताई। साथ ही, दामोदर और स्वर्णरेखा नदियों के बढ़ते प्रदूषण तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की विफलता पर भी राज्यपाल का ध्यान आकृष्ट कराया गया। प्रतिनिधिमंडल में वेदांत कौस्तव, अमित रिटजी और मलखान महतो शामिल थे।

