नयी दिल्ली। केरलम के सबरीमाला मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों में महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने एडवोकेट इंदिरा जयसिंह की दलीलों के जवाब में कहा कि सामाजिक सुधार के नाम पर धर्म को खोखला नहीं किया जा सकता। आस्था और विवेक के मामलों पर कोर्ट में बहस नहीं हो सकती। एडवोकेट जयसिंह ने सुनवाई के 10वें दिन कहा कि सबरीमाला मंदिर में एंट्री का फैसला अब भी लागू है। इस पर स्टे नहीं है, लेकिन मंदिर में प्रवेश नहीं मिल रहा है। जयसिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इसकी रिव्यू पिटिशन पर सुनवाई कर रहा है। हालांकि, कोर्ट कभी यह तय नहीं करता कि धर्म में क्या जरूरी है या और क्या नहीं। इसका फैसला तो धर्म ही करता है। इस पर जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि हम इस भूमि के सभ्यता के विकास और धार्मिक इतिहास को नजरअंदाज नहीं कर सकते। इसी बैकग्राउंड से संविधान के आर्टकिल 25 और 26 आये हैं। इस पर जयसिंह ने कहा कि इस पर डिबेट हो सकती है। यह क्लीन स्लेट है।
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