रांची। झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम करीब दो साल बाद आज होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार से बाहर आ गए हैं। टेंडर घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में घिरे आलमगीर आलम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिलते हुए जमानत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ही पूर्व मंत्री की जमानत याचिका मंजूर कर ली थी। हालांकि, मंगलवार को कोर्ट का लिखित आदेश आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड न हो पाने के कारण उनकी रिहाई में एक दिन की देरी हुई। आज आदेश की प्रति मिलने और बेल बॉन्ड की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया। आलमगीर आलम के साथ ही उनके निजी सहायक संजीव लाल को भी कोर्ट से जमानत मिली है।
पूर्व मंत्री को लेने के लिए उनकी पत्नी और विधायक निशात आलम खुद होटवार जेल पहुंची थीं। जानकारी के अनुसार, निशात आलम ही उनकी जमानतदार बनी हैं। जेल के बाहर बड़ी संख्या में उनके समर्थक और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे, जिन्होंने फूल-मालाओं के साथ उनका स्वागत किया। इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने आलमगीर आलम और उनके पीए संजीव लाल की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान आलमगीर आलम के वकीलों ने तर्क दिया कि, इस पूरे मामले में उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष आरोप नहीं हैं साथ ही जांच के दौरान उनके पास से कोई नकदी या आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई है और पूर्व मंत्री की तबीयत भी काफी खराब है और वे कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। अदालत ने बचाव पक्ष की इन दलीलों और मानवीय आधार पर विचार करते हुए उन्हें नियमित जमानत प्रदान की है।

