अजय शर्मा
रांची। झारखंड में टेरर फंडिंग की जांच कर रही एनआइए की टीम परेशान है। अधिकारियों पर भारी दबाव है। टेरर फंडिंग में जांच की सुई अब यहां के आइपीएस की ओर मुड़ रही है। टंडवा में सीसीएल की आम्रपाली और मगध में दबंग कमेटी बनाकर अरबों रुपये की वसूली करने में टीपीसी के उग्रवादी, सीसीएलकर्मी और स्थानीय कमेटी के लोग शमिल हैं। टंडवा थाना में चार मामले दर्ज हैं। इन चारों मामलों की जांच एनआइए कर रही है। इस मामले में पुलिस ने बड़े नक्सली बिंदु गंझू को गिरफ्तार किया है। बिंदु ने पुछताछ में जो खुलासे किये, उसमें कई अफसरों के नाम भी शामिल हैं। एनआइए को दो डायरी भी मिली है। उसमें भी ट्रांसपोर्टरों और अधिकारियों के नाम हैं। जांच के क्रम में एनआइए ने बड़े ट्रांसपोर्टरों का 164 के तहत बयान कराया है, जिसमें दिनेश केडिया, ट्रक एसोसिएशन के प्रहलाद सिंह का बयान भी लिया गया है। इस मामले में एनआइए 11 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। एनआइए को आक्रमण की तलाश है।
क्या कर रहे हैं अफसर
झारखंड में टेरर फंडिंग की पूरी जांच यहां के कुछ आइपीएस अधिकारियों के बयान के बिना पूरी नहीं होगी। एनआइए ने जो सूची तैयार की है, उसमें आठ अधिकारी भी शामिल हैं, जिसमें तीन चतरा के एसपी भी रह चुके हैं। अब दबाव यह बनाया जा रहा है कि पूरी जांच दबंग कमेटी, नक्सली और कोयला व्यापारियों पर ही केंद्रित रहे। आइपीएस अधिकारियों को इससे बाहर रखा जाये।
एनआइए ने क्या बनाया आधार
एनआइए मामले की जांच से अपने को सीधे तौर पर अलग नहीं कर सकती है। लिहाजा एनआइए के डीजी को झारखंड में तैनात एनआइए के अधिकारियों ने पूरी जानकारी दी और अनुरोध किया है कि इसकी जांच सीबीआइ से कराने की अनुशंसा की जाये। बताते चलें कि अभी दो माह पहले एनआइए के एसपी ने पैरवी कर यहां से अपना तबादला करवा लिया था।
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