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    Home»Breaking News»फीस पर स्कूल मैनेजमेंट, सरकार और अभिभावक सबको बड़ा दिल दिखाने की जरूरत : बाबूलाल मरांडी
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    फीस पर स्कूल मैनेजमेंट, सरकार और अभिभावक सबको बड़ा दिल दिखाने की जरूरत : बाबूलाल मरांडी

    azad sipahiBy azad sipahiMay 8, 2020No Comments2 Mins Read
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    • बीच का रास्ता निकाले सरकार
    • सक्षम लोगों को बिना किसी हिचक के स्कूल फीस जमा करनी चाहिए

    आजाद सिपाही संवाददाता

    रांची। भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि फीस के मुद्दे पर सरकार, स्कूल मैनेजमेंट और अभिभावक सबको बड़ा दिल दिखाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राज्य में निजी स्कूलों की ओर से लॉक डाउन अवधि की फीस माफ करने का मसला एक गंभीर मसला है। इसपर सरकार और स्कूल दोनों की अपनी-अपनी दलील है। शिक्षामंत्री जहां लॉकडाउन अवधि में स्कूल फीस नहीं लेने की बात कह रहे हैं वहीं कांग्रेस की राय इससे अलग है। शिक्षामंत्री का बयान अभिभावकों के हित में अच्छी सोच का परिचायक है। पर सरकार को निजी स्कूलों के प्रबंधन के तर्क पर भी विचार करना चाहिए। राज्य के निजी विद्यालयों में पौने तीन-तीन लाख शिक्षक और गैर शिक्षणकर्मी कार्यरत हैं। यदि निजी स्कूलों को कहीं से पैसे नहीं मिलेंगे तो वे अपने शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन कहां से देंगे। इसके अलावा स्कूल प्रबंधन के अन्य खर्चे भी हैं जिसमें बिजली बिल, नगर निगम का टैक्स और वाहनों की किस्त शामिल है।

    निजी स्कूलों की मदद करने की दिशा में कदम उठाये सरकार

    श्री मरांडी ने कहा कि इन बिंदुओं को समझते हुए सरकार को निजी स्कूलों की मदद करने की दिशा में कदम उठाने की जरूरत है। इस मुद्दे पर सरकार, स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों को बड़ा दिल दिखाने की जरूरत है। स्कूल प्रबंधन को चाहिए कि वह बेसिक फीस छोड़कर अन्य कोई शुल्क का बोझ अभिभावकों पर नहीं डाले। अगर स्कूल बंद है तो बस की पूरी फीस लेना अनुचित होगा। पर चूंकि बस के चालक और स्टाफ के परिवार के जीवन-यापन के उन्हें भी वेतन देना जरूरी है तो स्कूल प्रबंधन को इतना ही शुल्क लेना चाहिए कि उनके वेतन का खर्च निकल जाये। जो अभिभावक अपने बच्चों की फीस जमा करने में समर्थ हैं उन्हें फीस जमा करने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए। जो फीस जमा करने की स्थिति में नहीं हैं उन्हें लॉक डाउन की अवधि में रियायत देनी चाहिए। सभी बिंदुओं पर विचार करते हुए स्कूल प्रबंधन और अभिभावक दोनों के लिए बीच का रास्ता सरकार को निकालना चाहिए। फीस निर्धारण के लिए एक कमेटी मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री के पास विचाराधीन है। सभी बिंदुओं की समीक्षा कर अविलंब इसका रास्ता निकाला जाना चाहिए।

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