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    Home»Top Story»औरैया : चंबल सेंचुरी में शिकारियों के चलते फिर मंडराया घड़ियालों पर संकट
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    औरैया : चंबल सेंचुरी में शिकारियों के चलते फिर मंडराया घड़ियालों पर संकट

    shivam kumarBy shivam kumarJune 8, 2020Updated:June 8, 2020No Comments3 Mins Read
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    औरैया। राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी प्रतिबंधित इलाके में मछलियों का जमकर शिकार हो रहा है। मछली पकड़ने को डाले जाने वाला जाल में फंसकर घड़ियाल के बच्चे दम तोड़ देते हैं। इससे संरक्षित क्षेत्र में घड़ियालों का जीवन संकट में है। डाल्फिन शिकारियों के निशाने पर रहती हैं। उसकी बाजार में उन्हें मोटी रकम मिलती है लेकिन चंबल सेंचुरी के कर्मचारी इससे बेखबर बने रहते हैं।
    सन 1979 तत्कालीन केंद्र सरकार ने एक विशेष अधिसूचना जारी कर आगरा से पंचनद तक राष्ट्रीय चंबल को सेंचुरी इलाका घोषित किया था, जिसके चलते यहां किसी जल जीव, वन्य जीवों को किसी प्रकार का कोई शिकार नही होगा और इसमें घड़ियाल, डॉल्फ़िन को संरक्षित किया जाएगा। लेकिन इसके बाद भी यहा मछली का शिकार दिन रात बड़े पैमान पर फल फूल रहा है। इन्ही जालो में फसकर घड़ियाल के बच्चे अक्सर फस जाते और उन्हें कम पानी में छोड़ दिया जाता है जिससे उनकी मौत हो जाती है। कई बार तो किनारे आकर लग जाते फिर शिकारी उन्हें ठिकाने लगा देते है। स्थानीय लोगों की माने तो इटावा, औरैया व कानपुर के बाजार में चंबल सेंचुरी की मछली, कछुआ तथा डॉल्फ़िन बड़ी मांग के चलते आज तक यहां शिकार भारी मात्रा किया जाता है।
    चम्बल में शिकारी रात में ही शिकार करते है, जबकि यमुना में दिन रात बराबर यह काम जारी रहता है। सबसे ज्यादा यह काम पंचनद इलाके में चल रहा है। वही से सरकारी ठेका शुरू हो जाता हैं। जब कभी विभाग इनको पकड़ने को जाता है तो शिकारी नौका समेत ठेका क्षेत्र में चले जाते है। जैसे ही गस्ती दल वापस हो जाता फिर वो वही आकर शिकार करने लगते है। एक शिकारी ने बताया कि चंबल सेंचुरी इलाके में कम से कम प्रतिदिन एक लाख रुपये की मछली का शिकार होता है।
    सन 1979 में केंद्र सरकार ने एक अधिसूचना जारी करके उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश व राजस्थान की सयुक्त मांग पर चंबल नदी का 2100 वर्गमील इलाके के साथ इटावा के डिवोली से लेकर पंचनद यमुना नदी को भी राष्ट्रीय चम्बल सेंचुरी घोषित किया था। इसमें घड़ियाल, मगरमच्छ, डॉल्फ़िन व कछुआ को संरक्षित किया गया था। क्योंकि इस इलाके में चम्बल नदी में बड़ी संख्या ये जल जीव पाय जाते हैं।
    नीमा डाढ, असेवा, अनुरुदनगर, गपिया खार, नगला बनारस, ततारपुर, मचल की मड़ैया, हरपुरा, पथर्रा, महुआ, सूडा इन जगह पर शिकारियों की बड़ी संख्या में नोका व जाल बरामद किये जा सकते हैं। इन जगह पर शिकारी दिन रात शिकार करते देखे जाते हैं।
    चंबल वार्डन दिवाकर श्रीवास्तव ने बताय कि अभियान चला कर अभी कई जगह छापेमारी की जाएगी और लगातार पेट्रोलिग कराई जा रही है। किसी भी सूरत में चम्बल में किसी प्रकार का कोई शिकार नही होने दिया जायेगा और में जल्द कार्यवाही की जाएगी।
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