झारखंड में विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर है। सत्ता में वापसी के लिए प्रभावी रणनीति तैयार करने में जुटी भाजपा इस बार हर हाल में जीतना चाहती है। इसके लिए वह अपना घर तो मजबूत कर ही रही है, विरोधियों को कमजोर करने में भी कोई कसर नहीं छोड़ रही है। भाजपा के लिए झारखंड कितना महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोकसभा चुनाव के बाद से पार्टी के कम से कम आधा दर्जन नेता राज्य में प्रवास कर चुके हैं। झारखंड में विरोधियों को ‘चेक मेट’ करने के अभियान में पार्टी के केंद्रीय नेता जुटे हुए हैं। जातीय समीकरणों को खासा तवज्जो दिया जा रहा है और अलग-अलग नेताओं को अलग-अलग जातियों के नेताओं से बात करने की जिम्मेवारी सौंपी गयी है। इतना ही नहीं, भाजपा ने उन बूथों की पहचान की है, जहां से उसे बढ़त हासिल नहीं होती है। उन बूथों के लिए अलग-अलग लोगों को तैनात किया जा रहा है। दूसरे शब्दों में कहें, तो भाजपा इस बार साम-दाम-दंड-भेद, सभी हथियारों का इस्तेमाल करने के लिए पूरी तरह तैयार दिखती है। भाजपा की चुनावी तैयारियों और झारखंड की राजनीति में होनेवाली उथल-पुथल पर आजाद सिपाही पॉलिटिकल ब्यूरो की खास रिपोर्ट।
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