पांच महीने पहले दिसंबर में जब झारखंड विधानसभा का चुनाव हुआ था और झामुमो-कांग्रेस-राजद का गठबंधन ऐतिहासिक जीत हासिल कर सत्तारूढ़ हुआ था, तभी से राजनीतिक हलकों में कहा जाने लगा था कि हेमंत सोरेन के लिए शासन चलाना उतना आसान नहीं होगा, क्योंकि केंद्र में उनके प्रतिद्वंद्वी की सरकार है। हालांकि शपथ ग्रहण के ठी