झारखंड में विधानसभा चुनाव की गहमागहमी के बीच विपक्षी खेमे का माहौल बेहद तनावपूर्ण है। यहां एक मठ में इतने अधिक जोगी हो गये हैं कि हर कोई दूसरे पर आंखें तरेर रहा है। गठबंधन की कमान चूंकि झामुमो के पास है, इसलिए सबसे अधिक परेशानी उसको ही है। लोकसभा चुनाव में शिबू सोरेन की अप्रत्याशित हार के बाद से झामुमो में नये युग का आगाज हुआ है और हेमंत सोरेन के नेतृत्व को लगातार अपने ही सहयोगी दलों से चुनौती मिल रही है। पहले बाबूलाल मरांडी और फिर कांग्रेस के बाद अब राजद की ओर से तेजस्वी यादव ने भी गठबंधन को चुनौती दे दी है। अपने सहयोगी दलों के इस रवैये से हेमंत सोरेन कहीं न कहीं परेशान जरूर हो रहे हैं, क्योंकि यह चुनाव उनके लिए करो या मरो जैसा है। एक तरफ भाजपा बूथों की मैपिंग के स्तर तक पहुंच गयी है, तो दूसरी तरफ हेमंत सोरेन अपने सहयोगी नेताओं की धमकियों से जूझ रहे हैं। उनके सामने यह खतरा है कि अधिक संख्या में जोगी होने से कहीं मठ ही न उजड़ जाये। विपक्षी खेमे में इस असहज परिस्थिति के संभावित परिणाम पर दयानंद राय की खास रिपोर्ट।