झारखंड की पांचवीं विधानसभा के लिए पांच चरणों में संपन्न चुनाव कई मायनों में खास रहा। सबसे खास बात यह रही कि यह पूरा चुनाव चक्र दो नेताओं के इर्द-गिर्द घूमता रहा। पहला चेहरा स्वाभाविक तौर पर पहली बार राज्य में पांच साल तक सरकार चलानेवाले रघुवर दास का था, तो दूसरा चेहरा झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन का था। भाजपा ने जहां रघुवर दास को अगले सीएम के रूप में पेश किया, वहीं झामुमो के नेतृत्व में कांग्रेस और राजद ने हेमंत सोरेन को अपना नेता घोषित किया था। यही कारण है कि इस चुनाव के परिणाम से इन दोनों का राजनीतिक भविष्य तय होगा। यदि जीते, तो जय-जय होगी और यदि हार हुई, तो उसकी जिम्मेदारी भी इन दोनों को ही लेनी होगी। यही कारण है कि इन दोनों के दिन का चैन और रातों की नींद गायब हो गयी है। सोते-जागते उनके ख्यालों में विधानसभा चुनाव का परिणाम और उसका असर घूमता है। संथाल की 16 सीटें तो उनके लिए खासतौर पर निर्णायक हैं। यही वजह है कि दोनों नेताओं ने इन सीटों को अपनी-अपनी पार्टियों की झोली में डालने के लिए खुद को जुनून की हद तक चुनाव के मैदान में झोंक कर रख दिया। हालांकि संथाल के चुनावी दंगल में झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी, आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो और कांग्रेस समेत दूसरे दलों के साथ निर्दलीयों ने भी अपना दमखम दिखाया, पर यहां मुख्य मुकाबला भाजपा और झामुमो के बीच ही माना जा रहा है। इन दोनों नेताओं की रस्साकशी और उनकी राजनीति की पड़ताल करती दयानंद राय की रिपोर्ट।
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