तेहरान। ईरान में महंगाई और शासन के खिलाफ शुरू हुआ जन-आक्रोश अब एक बड़े विद्रोह का रूप ले चुका है। अशांति के दसवें दिन तक विरोध प्रदर्शनों की आग देश के 92 शहरों तक फैल गई है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, सुरक्षा बलों के साथ हुई हिंसक झड़पों में अब तक कम से कम 34 प्रदर्शनकारियों और 2 सुरक्षाकर्मियों समेत कुल 36 लोगों की जान जा चुकी है। मरने वालों में 4 किशोर भी शामिल हैं, जिनकी उम्र 18 साल से कम है।
खामेनेई के गढ़ में भी विरोध के स्वर ईरान के पवित्र शहर कोम से लेकर तेहरान के ग्रैंड बाजार तक, व्यापारियों और आम नागरिकों ने कामकाज ठप कर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदर्शनकारी अब सीधे देश के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई को चुनौती दे रहे हैं। इलम प्रांत के मलिकशाही और अब्दनान शहरों में स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। यहां प्रदर्शनकारियों ने सरकारी सुपरमार्केटों पर धावा बोला और सुरक्षा बलों के दमन के बावजूद पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
अस्पतालों में छापेमारी और गिरफ्तारी का दौर सुरक्षा बलों की बर्बरता की खबरें भी सामने आ रही हैं। चश्मदीदों के मुताबिक, सुरक्षाकर्मी तेहरान के सीना अस्पताल और इमाम खुमैनी अस्पताल के भीतर घुस गए और वहां इलाज करा रहे घायल प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। इस दौरान अस्पतालों के अंदर आंसू गैस के गोले भी दागे गए। अब तक पूरे देश से 2,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
विपक्ष और कुर्द पार्टियों का समर्थन इस बीच, सात ईरानी कुर्द विपक्षी दलों ने गुरुवार को देशव्यापी ‘आम हड़ताल’ का आह्वान किया है। निर्वासित राजकुमार रजा पहलवी ने भी वीडियो संदेश के जरिए प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है। अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच ईरान सरकार ने इलम में हुई हिंसा की जांच के आदेश तो दिए हैं, लेकिन जमीन पर दमनकारी कार्रवाई रुकने का नाम नहीं ले रही है।

