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    Home»Jharkhand Top News»भारत का संविधान हमें एक सूत्र में जोड़ने की प्रेरणा देता है : योगी आदित्यनाथ
    Jharkhand Top News

    भारत का संविधान हमें एक सूत्र में जोड़ने की प्रेरणा देता है : योगी आदित्यनाथ

    shivam kumarBy shivam kumarJanuary 26, 2026No Comments6 Mins Read
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    -योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री आवास पर तिरंगा फहराया
    लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर अपने सरकारी आवास पांच कालिदास मार्ग पर तिरंगा फहराया। प्रदेशवासियों को गणतंत्र दिवस की बधाई देते हुए कहा कि हमें विकसित भारत के संकल्पों को सिद्धि प्रदान करने का दिवस है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि मैं उत्तर प्रदेश के सभी नागरिकों को हृदय से बधाई देता हूं। आज ही के दिन 1950 में भारत का संविधान लागू हुआ था। 76 वर्ष की इस यात्रा में अनेक उतार चढ़ाव हमारे इस संविधान ने देखे हैं। इस सब के बावजूद एक भारत श्रेष्ठ भारत के अपने संकल्पों के अनुरूप उत्तर से दक्षिण तक पूर्व से पश्चिम तक प्रत्येक भारतवासी के गौरव, भारत की एकात्मकता और अखंडता के लक्ष्य को आगे बढ़ते हुए आज हम सब एक नए भारत का दर्शन कर रहे हैं। इसमें हमारे संविधान की एक महत्वपूर्ण भूमिका है।

    सीएम योगी ने कहा कि मैं इस अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जिनके नेतृत्व में भारत के स्वाधीनता आंदोलन ने नई ऊंचाइयां प्राप्त की, उनकी स्मृति को नमन करता हूं। भारत के संविधान सभा के अध्यक्ष गणतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद जी, भारत संविधान के शिल्पी बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर, वर्तमान भारत के शिल्पकार लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल, क्रांतिकारियों के सिरमौर नेताजी सुभाष चंद्र बोस समेत भारत माता के उन महान सपूतों को जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया, इस आंदोलन में बढ़चढ़कर के भाग लेकर देश की आजादी को सुनिश्चित किया और स्वतंत्र भारत में देश की सुरक्षा के लिए, आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा के लिए अपने आपको बलिदान किया है। ऐसे भारत माता के सभी ज्ञात-अज्ञात सपूतों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी स्मृतियों को नमन करता हूँ।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सब जानते हैं कि 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ है। उसके पहले भारत के संविधान सभा के निर्वाचन संपन्न हो चुके थे। डॉ राजेंद्र प्रसाद के नेतृत्व में भारत के संविधान के निर्माण के उपरांत 26 नवंबर 1949 को भारत ने अपना संविधान अंगीकार किया। आज पूरा देश 26 नवंबर की तिथि को संविधान दिवस के रूप में आयोजित करता है। हर भारतवासी का दायित्व बनता है कि हम अपने संविधान के प्रति पूरी श्रद्धा और समर्पण के भाव के साथ कार्य करें। क्योंकि सम और विषम परिस्थितियों में भारत का यह संविधान संबल प्रदान करता है। भारत के संविधान की यह पंक्तियां कि ‘हम भारत के लोग’ लोगों के लिए एक नई प्रेरणा है। भारत के संविधान का असली संरक्षक अगर कोई है तो भारत का नागरिक है। उस भारत के नागरिक के प्रति हर एक संस्था को, हर एक मंत्रालय और विभागों को अपनी जवाबदेही को सुनिश्चित करना होगा। यह संविधान के प्रति हमारे समर्पण के भाव को व्यक्त करता है।

    हम सब इस बात को जानते हैं कि जब भी हम संविधान की मूल भावनाओं का अनादर करते हैं तो वास्तव में भारत माता के उन महान सपूतों का जिनके बल पर यह देश स्वतंत्र हुआ, उनका हम अनादर भी करते हैं। यह अनादर भारत के संविधान का ही नहीं बल्कि उन महान पुरुषों का भी है जिनके बल पर देश आजाद हुआ है। इसलिए हम सब का दायित्व बनता है कि संविधान के प्रति समर्पण भाव के साथ कार्य करें। यह हमारे लिए पवित्र दस्तावेज है। जो हर विपरीत परिस्थिति में हमारा मार्गदर्शक होगा। भारत को एकता और अखंडता के सूत्र में बांधने से लेकर के देश के अंदर न्याय, बंधुता और समता के एक भाव को प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाने के इस क्रम को हमें जारी रखना होगा। याद रखना यह तीन शब्द न्याय, समता और बंधुता, हर नागरिक को बिना भेदभाव के न्याय मिले, देश के अंदर जाति, मत, मजहब के आधार पर किसी प्रकार का भेद भाव न हो। परस्पर समता और बंधुता का यह माहौल पूरे देश के अंदर आगे बढ़ेगा तो भारत को विकसित भारत बनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के अभियान को कोई रोक नहीं सकता। विकसित भारत की संकल्पना हर भारतवासी के लिए गौरव का क्षण होना चाहिए क्योंकि यह क्षण केवल देश की आर्थिक समृद्धि का ही नहीं बल्कि हर एक नागरिक के जीवन में खुशहाली का अवसर होगा। हर व्यक्ति समृद्ध होगा। लेकिन इसका रास्ता समाज के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति से प्रारंभ होता है। हमारे गांव से, गलियों से, समाज के अलग-अलग क्षेत्र के अंतिम पायदान पर बैठे हुए उन नागरिकों के माध्यम से यात्रा आगे बढ़ानी चाहिए। हर स्तर पर आत्मनिर्भरता के भाव के साथ हमें आगे बढ़ना होगा। याद रखना भारत के संविधान के शब्द जिनके बारे में प्रधानमंत्री मोदी बार-बार कहते हैं कि इन तीन शब्दों ने भारत के संविधान को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत को स्थापित करने में सबसे बड़ी भूमिका का निर्वहन किया है।

    आजादी के पूर्व देश को सामाजिक रूप से तोड़ने, विभाजित करने के लिए दुष्चक्र प्रारंभ हुए थे। कुछ लोगों ने जाति आधार पर, क्षेत्र के आधार पर और कुछ भाषाई आधार पर देश को विभाजित करने के षड्यंत्र रचे थे लेकिन वे सभी षड्यंत्र अधिक दिनों तक टिक नहीं पाए। जब भी संविधान के मूल भाव को कमजोर करने की कोशिश होती है तो आप देखते होंगे कि कहीं न कहीं से यह सुगबुगाहट भी शुरू हो जाती है। वह अधिक दिन तक टिक नहीं पाते हैं। देश का संविधान हम सबको जोड़ने की प्रेरणा देता है। कोई व्यक्ति अगर यह कहता है कि मैं न्याय से ऊपर हूँ, संविधान से ऊपर हूँ, व्यवस्था से ऊपर हूँ, ऐसे लोग भारत के संविधान की अवमानना कर रहे हैं। यह नहीं चल सकता है। आज का यह दिवस हम सबको भारत के इस महान संविधान के प्रति समर्पण भाव के साथ आगे बढ़ाने और संकल्पों को आगे बढ़ाने के लिए नई प्रेरणा का दिवस है।

    हम सब उत्तर प्रदेशवासी भारत के संविधान को सम्मान देते हुए सभी राष्ट्र नायकों के प्रति सम्मान देने व राष्ट्र के संकल्पों को ऊंचाइयों पर ले जाने का अवसर होगा। हम एक बार फिर से उत्तर प्रदेश वासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हैं।

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    shivam kumar

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