रांची: केंद्र सरकार द्वारा झारखंड के सर्वमान्य नेता और ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान देने की घोषणा का राज्य के राजनीतिक गलियारों में पुरजोर स्वागत किया गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ने ही इसे झारखंड की अस्मिता और गौरव का प्रतीक बताया है।
भाजपा: ‘मोदी सरकार ने किया झारखंड की विभूति का सम्मान’
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि श्रद्धेय गुरुजी का पूरा जीवन संघर्ष और जनकल्याण को समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन ने राज्य में व्याप्त अशिक्षा, नशाखोरी और सूदखोरी जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ जो निर्णायक लड़ाई लड़ी, उसे भुलाया नहीं जा सकता। साहू के अनुसार, झारखंड अलग राज्य आंदोलन को वर्षों तक नेतृत्व देने वाले व्यक्तित्व को यह सम्मान मिलना हर झारखंडी के लिए गर्व की बात है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मोदी सरकार लगातार राज्य के शहीदों और कलाकारों को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिला रही है।
कांग्रेस: ‘ऐतिहासिक संघर्ष की पहचान, अब भारत रत्न की बारी’
वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने भी इस निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलन के दौरान गरीब, शोषित और वंचित वर्गों के सशक्तिकरण के लिए गुरुजी द्वारा किए गए कार्य ऐतिहासिक हैं। हालांकि, कांग्रेस ने इस मौके पर एक बड़ी मांग भी दोहराई। कमलेश ने कहा कि झारखंडवासियों की यह दिली भावना है कि राज्य निर्माण और सामाजिक परिवर्तन में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें ‘भारत रत्न’ दिया जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार भविष्य में इस दिशा में गंभीरता से विचार करेगी।
शिबू सोरेन का व्यक्तित्व आज भी झारखंड के युवाओं और समाज के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है। राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर, राज्य के दोनों प्रमुख दलों ने माना है कि यह सम्मान गुरुजी के विचारों और उनके द्वारा किए गए सामाजिक सुधारों की जीत है।

