श्रीनगर: आठ जुलाई 2016 को हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर और आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद से पूरी कश्मीर घाटी 100 दिनों तक कर्फ्यू और दंगे की आग में जलती रही। स्कूल भी बंद हो गये और कई बच्चों का भविष्य अंधेरे में डूब गया। लेकिन इस अंधेरे में रोशनी बनीं पुलवामा की शाहिरा अख्तर और आज पूरे देश में यह रोशनी फैल चुकी है। शाहिरा 17 वर्ष की वह लड़की है, जिसने कश्मीर की बोर्ड परीक्षा (12वीं) में टॉप किया है। शाहिरा ने 500 में से 498 नंबर हासिल किये हैं। आप यह जानकर हैरान रह जायेंगे कि शाहिरा साउथ कश्मीर के उसी त्राल से हैं, जहां का आतंकी बुरहान वानी था और उसी स्कूल में पढ़ती हैं, जिसमें कभी बुरहान वानी पढ़ता था। कश्मीर बोर्ड परीक्षा का नतीजा सोमवार को आया है। बोर्ड परीक्षाएं भी इस बार कश्मीर में सुरक्षा के सख्त पहरे में हुई हैं। श्रीनगर से 40 किलोमीटर दूर डाडसर गांव की रहनेवाली शाहिरा सरकारी गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ती हैं। उन्होंने ऐसा अध्याय लिख डाला है, जो लोगों को याद रहेगा।
कश्मीर बोर्ड के 53,159 बच्चों ने इस बार परीक्षा में हिस्सा लिया। इसमें से 40,119 छात्र पास हुए हैं। परीक्षा में 76.08 प्रतिशत लड़कियां पास हुई हैं, वहीं 74.95 प्रतिशत लड़के पास हुए हैं। वर्ष 2015 में जब स्थितियां सामान्य थीं, पास होनेवाले छात्रों का प्रतिशत सिर्फ 55.18 था।
दंगों की वजह से नहीं जा पाती थीं कोचिंग
दंगों की वजह से शाहिरा को घर पर ही रहना पड़ा और उनकी कोचिंग भी बंद हो गयी। उन्होंने बताया कि 27 जुलाई से ही वह कोचिंग नहीं जा पायीं और अगस्त में उनके दादाजी का निधन हो गया। उन्हें इस बात की काफी चिंता थी कि उनका गणित का सिलेबस 60 प्रतिशत भी पूरा नहीं था। सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन और मार्च हो रहे थे। इसके बाद शाहिरा गांव के लोकल कम्युनिटी लेवल के कोचिंग सेंटर गयीं और उन्होंने अपना सिलेबस पूरा किया। बोर्ड टॉपर शाहिरा अब नीट यानी नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट देना चाहती हैं। शाहिरा का परिवार भी उनकी सफलता से काफी खुश है। शाहिरा अपनी सफलता का श्रेय खुदा, परिवार और अपने टीचर्स को देती हैं। वह बताती हैं कि जब कभी भी वह परेशान होती थीं, तो अपने टीचर्स के पास जाती थीं। लेकिन टीचर्स के पास जाने के लिए उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता था, ताकि वह सड़कों पर जारी विरोध-प्रदर्शन और मार्च के दौरान होनेवाली हिंसा से बच सकें। शाहिरा के पिता कहते हैं, उन्होंने हमेशा अपनी बेटी को पढ़ाई पर ध्यान देने की सलाह दी। वह चाहते हैं कि शाहिरा हमेशा ऐसी ही नयी ऊंचाइयों को छूती रहे।