रांची। सुप्रीम कोर्ट ने लातेहार की तत्कालीन जिला शिक्षा अधीक्षक कमला सिंह की एसएलपी पर सुनवाई करते हुए वर्ष 2023 में झारखंड हाइकोर्ट द्वारा उनके रिट में पारित आदेश पर रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार, एंटी करप्शन ब्यूरो को नोटिस जारी किया है। कमला सिंह पर लातेहार के जिला शिक्षा अधीक्षक रहते हुए वर्ष 1995 से 2005 के बीच आर्थिक गड़बड़ी की शिकायत वर्ष 2013 में लोकायुक्त के समक्ष की गयी थी। वर्ष 2017 में लोकायुक्त ने इस शिकायत पर आदेश पारित करते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो को कमला सिंह की संपत्ति की जांच करने का आदेश दिया था, जिसे लेकर कमला सिंह की ओर से झारखंड हाइकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की गयी थी। हाइकोर्ट ने वर्ष 2018 में लोकायुक्त के आदेश पर रोक लगा दी थी। 19 सितंबर 2023 को हाइकोर्ट ने कमला सिंह के रिट पिटीशन को निरस्त कर दिया था। कमला सिंह की ओर से हाइकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल की गयी। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता मनोज टंडन ने पक्ष रखते हुए कहा कि लोकायुक्त अधिनियम 2001 के सेक्शन आठ के तहत किसी सरकारी सेवक पर आरोप लगने के पांच साल के भीतर जांच करने का आदेश दिया जा सकता है, लेकिन यह मामला 2005 का है और और वर्ष 2013 में इसकी शिकायत रवि कुमार डे द्वारा लोकायुक्त से की गयी थी। इसके तहत 2017 में लोकायुक्त ने इनकी संपत्ति की जांच का आदेश दिया था, जो गलत है। लोकायुक्त का आदेश कालबाधित नहीं होना चाहिए था। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की।
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