-हेमंत ने सौंपा इस्तीफा, चंपई के पक्ष में सर्मथन पत्र
-सत्ता पक्ष के विधायकों ने राज्यपाल को सौंपा पत्र
-केवल पांच विधायकों से मिले राधाकृष्णन
आजाद सिपाही संवाददाता
रांची। हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के साथ ही राज्य में सियासी हलचल बढ़ गयी। उनकी गिरफ्तारी के पूर्व हेमंत सोरेन राजभवन पहुंचे। उन्होंने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपा। सत्ताधारी दल (कांग्रेस, झामुमो, राजद) के विधायक तीन बस में सवार होकर राजभवन पहुंचे थे। हालंकि राज्यपाल ने केवल पांच विधायकों से मुलाकात की। उन्होंने चंपई सोरेन को गठबंधन दल का नेता बनाने और उनके नेतृत्व में सरकार गठन का पत्र दिया। विधायकों ने तत्काल चंपई सोरेन को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने की मांग की। हालांकि राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने मांग को नहीं स्वीकार किया और मामले पर जल्द फैसला लेने का आश्वासन दिया।
तीन बस में विधायक पहुंचे राजभवन:
मुख्यमंत्री आवास से सत्ता पक्ष के विधायक तीन बस में सवार होकर रात 8.20 बजे राजभवन पहुंचे। उन्हें राजभवन के गेट पर ही रोक दिया गया। इस पर विधायकों ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने चंपई सोरेन को तत्काल मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने की मांग की। राज्यपाल से मिलने पांच विधायक अंदर गये। उन्होंने चंपई सोरेन को समर्थन का पत्र सौंपा। राज्यपाल ने उन्हें विधिसम्मत कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। सूत्रों के मुतबिक राज्यपाल विधि और संविधान विशेषज्ञों से राय लेने के बाद कोई कदम उठायेंगे।
कौन हैं चंपई सोरेन
रांची (आजाद सिपाही) सरायकेला-खरसावां जिला स्थित जिलिंगगोड़ा गांव निवासी आदिवासी सिमल सोरेन खेती किसानी किया करते थे। उनके चार बच्चों में बड़े बेटे का नाम चंपई सोरेन है। चंपई भी अपने पिता के साथ हाथ बंटाते थे। 10वीं क्लास तक सरकारी स्कूल से चंपई ने पढ़ाई लिखाई की। इस बीच उनका विवाह कम उम्र में ही मानको से कर दिया गया। शादी के बाद चंपई के चार बेटे और तीन बेटियां हुईं। इसी दौरान बिहार से अलग झारखंड राज्य की मांग उठने लगी। शिबू सोरेन के साथ ही चंपई भी झारखंड के आंदोलन में उतर गये। जल्द ही ‘झारखंड टाइगर’ के नाम से मशहूर भी हो गये। इसके बाद चंपई सोरेन ने अपनी सरायकेला सीट से उपचुनाव में निर्दलीय विधायक बन कर अपने राजनीतिक करियर का आगाज कर दिया। इसके बाद वह झारखंड मुक्ति मोर्चा में शामिल हो गये। चंपई सोरेन भाजपा की अर्जुन मुंडा की सरकार में झामुमो की तरफ से मंत्री बनाये गये। इसके बाद राष्ट्रपति शासन लग गया था। फिर हेमंत सोरेन की अगुवाई में बनी झामुमो की सरकार में चंपई सोरेन को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, परिवहन मंत्री बनाया गया। दूसरी बार हेमंत सरकार बनी तो फिर 2019 में चंपई सोरेन को परिवहन, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री बनाया गया। वह वर्तमान में झामुमो के उपाध्यक्ष भी हैं।