एम्बुलेंस लापरवाही के मामले लगातार बढ़े…..
बरवाडीह। बरवाडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनहीनता थमने का नाम नहीं ले रही है। ताज़ा मामले में ब्रेन हेमरेज से पीड़ित 45 वर्षीय राजू राम (पिता स्व. छठु राम), निवासी पैरा, बरवाडीह को शनिवार को बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया था।
लेकिन एम्बुलेंस में डीजल नहीं होने के कारण मरीज को घंटों अस्पताल परिसर में ही तड़पता छोड़ दिया गया।परिजनों के अनुसार अस्पताल प्रबंधन की ओर से स्पष्ट रूप से कहा गया कि जब तक एम्बुलेंस के लिए 600 रुपये डीजल के नहीं दिए जाएंगे, तब तक मरीज को एम्बुलेंस नहीं दिया जाएगा। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार रुपये का इंतजाम नहीं कर सका, जिससे मरीज की हालत लगातार बिगड़ती चली गई।गौरतलब है कि यह लगातार दूसरी बार एम्बुलेंस से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है। पिछले महीने भी एक गरीब और लाचार मरीज को एम्बुलेंस नहीं मिल रही थी, जिसके बाद उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप और निर्देश के बाद ही सरकारी एम्बुलेंस उपलब्ध कराई जा सकी थी। इसके बावजूद जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं होने से अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी का मनोबल बढ़ता जा रहा है और ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं।चिकित्सा प्रभारी डॉ. मंटू कुमार ने एम्बुलेंस चालक को यह निर्देश दिया है कि बिना तेल भरवाए वाहन लेकर नहीं जाना है और मरीजों को ही डीजल की व्यवस्था करनी होगी।
यह निर्देश सरकार की मुफ्त एम्बुलेंस सेवा की मंशा पर सीधे सवाल खड़े करता है।मौजूदा मामले की जानकारी मिलने पर पश्चिमी जिला परिषद सदस्य संतोषी शेखर ने मानवीय पहल करते हुए अपने निजी पैसे से 600 रुपये का डीजल भरवाया, तब जाकर सरकारी एम्बुलेंस से मरीज को एमएमसीएच, मेदिनीनगर भेजा जा सका।घटना को लेकर प्रखण्ड प्रमुख सुशीला देवी ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि यह बेहद शर्मनाक और अमानवीय है। जब सरकार मुफ्त एम्बुलेंस सेवा चला रही है, तब गंभीर मरीज से डीजल के पैसे मांगना सीधे-सीधे अपराध है। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम की क्रूरता है। ऐसे लोगों को तुरंत चिन्हित कर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
वहीं जिला परिषद सदस्य संतोषी शेखर ने कहा नए चिकित्सा प्रभारी के आने के बाद से बरवाडीह सीएचसी लगातार किसी न किसी मामले को लेकर सुर्खियों में है। कभी एम्बुलेंस की समस्या, तो कभी इलाज में लापरवाही सामने आ रही है। कार्रवाई नहीं होने के कारण जिम्मेदारों का मनोबल बढ़ता जा रहा है। इस पूरे मामले में अविलंब कठोर कार्रवाई जरूरी है। सिर्फ एम्बुलेंस ही नहीं, इससे पहले जिला सांसद प्रतिनिधि डॉ. चन्दन कुमार ने भी अस्पताल में गंभीर लापरवाही का मामला उजागर किया था। निरीक्षण के दौरान ऑपरेशन के बाद इस्तेमाल की गई सिरिंच और फर्श पर रक्त के धब्बे पाए गए थे, जो संक्रमण फैलने का बड़ा खतरा थे।
इस मामले ने भी अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे, लेकिन तब भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो बरवाडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों की जान हमेशा खतरे में बनी रहेगी। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से उच्चस्तरीय जांच, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और स्वास्थ्य व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की है।

