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    Home»विशेष»मोदी की कूटनीति की जीत है टैरिफ घटाने का ट्रंप का फैसला
    विशेष

    मोदी की कूटनीति की जीत है टैरिफ घटाने का ट्रंप का फैसला

    shivam kumarBy shivam kumarFebruary 4, 2026No Comments8 Mins Read
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    विशेष
    भारत को आर्थिक महाशक्ति के रूप में मान्यता मिलने का एलान है यह फैसला
    यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौता और भारत की ताकत के आगे झुके ट्रंप
    प्रधानमंत्री मोदी ने फिर साबित किया कि भारत अब किसी के सामने नहीं झुकेगा

    भारत ने अमेरिका के साथ जारी व्यापार गतिरोध, जिसे टैरिफ वॉर भी कहा जाता है, में बड़ी जीत हासिल की है। द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण सुधार के तहत अमेरिका ने भारत पर लगाये जाने वाले पारस्परिक शुल्क, यानी टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की है। यह घटनाक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई टेलीफोन वार्ता के बाद सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा की गयी यह घोषणा महीनों से चल रहे शुल्क संबंधी तनाव के बाद भारत-अमेरिका व्यापार नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देती है। पिछले साल ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया था और भारत द्वारा रूसी तेल के आयात पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगाया था, जिससे भारत सबसे अधिक शुल्क वाले देशों में शामिल हो गया था। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के फैसले के बाद भारत के साथ उसके कूटनीतिक रिश्तों में खटास पैदा हो गयी थी, जिसका सीधा असर ट्रंप को अपनी घरेलू राजनीतिक परिस्थितियों पर पड़ने लगा था। इधर भारत ने पहले रूस और फिर यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौते कर अमेरिका को बता दिया था कि भारत अब किसी के सामने झुकेगा नहीं। यह पीएम मोदी की मारक कूटनीति थी और उन्होंने भारत को आर्थिक महाशक्ति के रूप में मान्यता दिलाने के लिए हरसंभव कदम उठाये थे। अमेरिकी राष्ट्रुपति द्वारा टैरिफ घटाये जाने का फैसला उसी कूटनीति का परिणाम है। भारत और अमेरिका के बीच हुए इस घटनाक्रम के पीछे क्या कुछ हुआ और क्या होगा इसका परिणाम, बता रहे हैं आजाद सिपाही के संपादक राकेश सिंह।

    लगातार बिगड़ रही भू-राजनीतिक स्थिति के बीच दुनिया भर में भारत का परचम एक बार फिर लहराया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति का असर एक बार फिर सामने आया है। कई महीनों से अटकी भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर आखिरकार सहमति बन गयी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक एलान कर दिया कि भारतीय सामानों पर लगने वाला टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किया जा रहा है। यह फैसला इसलिए भी चौंकाने वाला रहा, क्योंकि इससे पहले तक बातचीत बेनतीजा रही थी और अमेरिका लगातार भारत पर दबाव बना रहा था।

    महीनों से फंसी थी बात
    भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत काफी समय से चल रही थी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल पा रहा था। अमेरिका ने तो दबाव बनाने के लिए भारतीय सामानों पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ भी लगा दिया था। ट्रंप प्रशासन की शर्त साफ थी कि अगर भारत को व्यापार समझौता चाहिए, तो उसे रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद करना होगा। हालांकि ट्रंप ने अब दावा किया है कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करने पर राजी हो गया है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टैरिफ घटने के फैसले का स्वागत जरूर किया, लेकिन रूस से तेल खरीदने को लेकर कोई बात नहीं कही है।
    यहां बड़ा सवाल यह है कि आखिर अमेरिकी राष्ट्रपति को यह फैसला क्यों लेना पड़ा। इस सवाल का जवाब इतना आसान नहीं है। माना जा रहा है कि ट्रंप को तीन वजहों से यह फैसला लेने पर मजबूर होना पड़ा। ये तीन वजह भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौता वार्ता, दुनिया में भारत की बढ़ती ताकत और अमेरिका की घरेलू राजनीतिक परिस्थितियां हैं।

    कारण नंबर-1: भारत-यूरोपीय संघ के बीच समझौता
    दरअसल ट्रंप के इस फैसले के पीछे भारत और यूरोपीय संघ (इयू) के बीच हुआ बड़ा व्यापार समझौता अहम वजह बना। भारत और इयू के बीच हाल ही में मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) पर बातचीत पूरी हुई है, जिसे दोनों पक्षों ने ह्यअब तक की सबसे बड़ा व्यापार समझौताह्ण या ह्यमदर आॅफ आॅल डील्सह्ण बताया है। इस समझौते से भारत की ताकत बातचीत में बढ़ गयी और अमेरिका को यह डर सताने लगा कि कहीं वह पीछे न छूट जाये। खुद प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ दिन पहले ही भारत-इयू समझौते को विकास, निवेश और रणनीतिक साझेदारी के लिए बड़ा कदम बताया था।

    कारण नंबर-2: दुनिया में भारत की बढ़ती ताकत
    अमेरिका को यह आभास हो चला था कि भारत से पंगा लेकर दक्षिण एशिया में वह अपनी स्थिति मजबूत नहीं कर सकता है। यूरोपीय संघ से बातचीत से पहले रूस के राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा और विदेश मंत्री एस जयशंकर की मध्य पूर्व की सफल कूटनीतिक यात्राओं ने अमेरिका को बता दिया था कि भारत को साथ लिये बिना उसकी दाल नहीं गलनेवाली है। ईरान के साथ तनाव के बीच जब अमेरिका को भारत का साथ नहीं मिला, तो उसे पता चल गया कि प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति के आगे सरेंडर करना ही होगा।

    कारण नंबर-3: अमेरिका की घरेलू राजनीति
    ट्रंप को भारत के साथ रिश्ते सुधारने पर मजबूर करने की तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण वजह अमेरिका की घरेलू राजनीति रही। वेनेजुएला घटनाक्रम के बाद ट्रंप की लोकप्रियता में अभूतपूर्व गिरावट आयी है। भारत जैसे बड़े बाजार से बाहर होने का खतरा भी उनके सामने मंडराने लगा था। ट्रंप हर तरफ से घिरते जा रहे थे और संयुक्त राष्ट्र संघ के बराबर पीस बोर्ड बनाने के बावजूद उन पर दबाव बढ़ रहा था। ऐसे में उनके सामने भारत के सामने झुकने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था।

    एक और कारण: रूस का तेल
    अमेरिका के लिए यह सिर्फ व्यापार का नहीं, बल्कि राजनीति और ऊर्जा नीति का भी मामला है। ह्वाइट हाउस चाहता है कि रूस की तेल से होने वाली कमाई कम की जाये, ताकि यूक्रेन युद्ध पर दबाव बढ़ाया जा सके। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने हाल ही में कहा था कि भारत द्वारा रूस से तेल आयात लगभग खत्म हो चुका है और इससे टैरिफ हटाने का रास्ता साफ होता है।

    कई और कारण भी हो सकते हैं
    वैसे ट्रंप के इस अचानक एलान के पीछे कई रणनीतिक और आर्थिक कारण भी हो सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप खुद को ह्यग्लोबल डीलमेकरह्ण के तौर पर पेश करना चाहते हैं। भारत जैसी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ बड़ा व्यापार समझौता उनके लिए राजनीतिक और आर्थिक दोनों लिहाज से फायदेमंद है।

    अमेरिकी घोषणाओं का तरीका भी रोचक
    भारत पर टैरिफ घटाने की घोषणा से पहले हुई तमाम घटनाओं का क्रम जानबूझ कर ऐसा रखा गया। व्यापार समझौते के एलान से ठीक पहले भारत में नये अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया पर लिखा, राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी से बात की है, बने रहिये। इसके थोड़ी ही देर बाद समझौते का एलान हो गया। इससे साफ हो गया कि यह फैसला सीधे सबसे ऊंचे स्तर पर लिया गया था।

    वेनेजुएला और अमेरिका से तेल खरीदने का दावा
    ट्रंप ने यह भी कहा है कि भारत अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदेगा और भविष्य में वेनेजुएला से भी तेल ले सकता है। इसका मकसद यह है कि अगर रूस या ईरान को लेकर हालात बिगड़ें, तो तेल की कीमतें अचानक न बढ़ें। ईरान को लेकर बढ़ता तनाव अमेरिका के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि मध्य पूर्व में किसी भी टकराव का सीधा असर दुनिया भर के तेल बाजार पर पड़ता है।

    दोनों नेताओं को होगा फायदा
    राजनीतिक तौर पर यह समझौता दोनों के लिए फायदेमंद है। ट्रंप यह दिखा सकते हैं कि उन्होंने टैरिफ को हथियार बनाकर रूस पर दबाव बनाया। मोदी को कम टैरिफ के रूप में भारतीय निर्यात के लिए राहत मिली। इसके अलावा अमेरिका चाहता है कि भारत चीन के बाहर एक बड़ा मैन्युफैक्चरिंग और रक्षा साझेदार बने, जबकि भारत चाहता है कि अमेरिका से नजदीकी रिश्तों का सीधा फायदा दिखे।

    क्या कहा प्रधानमंत्री मोदी ने
    डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ घटाने के एलान के बाद पीएम मोदी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस समझौते की जानकारी दी। उन्होंने लिखा, आज अपने प्यारे दोस्त राष्ट्रपति ट्रंप से बात करके बहुत अच्छा लगा। खुशी है कि अब मेड इन इंडिया उत्पादों पर टैरिफ 18 प्रतिशत कम हो जायेगा। इस शानदार घोषणा के लिए भारत के 1.4 अरब लोगों की तरफ से राष्ट्रपति ट्रंप को बहुत-बहुत धन्यवाद। पीएम मोदी ने आगे लिखा कि जब दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र एक साथ काम करते हैं, तो इससे हमारे लोगों को फायदा होता है और आपसी फायदे वाले सहयोग के लिए बहुत सारे मौके खुलते हैं। पीएम मोदी ने ट्रंप की तारीफ करते हुए कहा कि वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए राष्ट्रपति ट्रंप का नेतृत्व बहुत जरूरी है। भारत शांति के लिए उनके प्रयासों का पूरा समर्थन करता है। मैं अपनी पार्टनरशिप को नयी ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूं।
    कुल मिलाकर ट्रंप का अचानक टैरिफ घटाने का फैसला भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत, इयू के साथ हुआ समझौता और अमेरिकी घरेलू राजनीति, तीनों का नतीजा माना जा सकता है। हालांकि अभी इस व्यापार समझौते का पूरा ब्लूप्रिंट सामने आना बाकी है। फिलहाल इतना तय है कि ह्यमेड इन इंडियाह्ण को अमेरिकी बाजार में बड़ी राहत मिली है, लेकिन रूसी तेल, जीरो टैरिफ और पांच सौ अरब डॉलर की खरीद जैसे दावों पर अंतिम तस्वीर आधिकारिक दस्तावेज आने के बाद ही साफ हो पायेगी।

     

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