रांची। जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक और छत्तीसगढ़ के विधायक रहे गणेश राम भगत ने कहा कि हम मर जायेंगे फिर भी डिलिस्टिंग की मांग को नही छोड़ेंगे।
उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के लोग अपनी परंपरा, रीति, रिवाज,धार्मिक,सामाजिक आस्था को समझे और उसे अपने साथ लेकर चले तभी हम सभी के हक और अधिकारों को लूटने से बचा सकते है। भगत रविवार को जनजाति सुरक्षा मंच की ओर से नगड़ी के स्वररेखा बैंक्वेट हॉल में आयोजित जनजाति समाज के प्रांतीय सम्मेलन बोल रहे थे।
भगत ने कहा कि आज एक षड्यंत्र के तहत हमारी आस्था, रूढ़ि परंपरा पर हमला किया जा रहा है। उसे नष्ट किया जा रहा ताकि इस देश से आदिवासियत समाप्त हो जाये। हम सभी जनजाति समाज के लोग पाश्चात्य संस्कृति को धड़ल्ले से अपना रहे हैं। हम अपनी परंपरागत पे,वाद्य यंत्र मांदर,शादी विवाह में गाये जाने वाली गीत, नृत्य एवं अखड़ा संस्कृति को धीरे धीरे छोड़ रहे है। आज जनजातीय समाज के लोग अपने गोत्र को भी अपने नाम के साथ प्रयोग नही कर रहे हैं। इसका नतीजा है कि आज अनुसूचित जनजाति समाज और धर्म परिवर्तित किए हुए लोगों के बीच अंतर पैदा नही कर पा रहे है।
जगलाल पाहन ने कहा कि इस सुरक्षा मंच का गठन राष्ट्रीय स्तर पर हमारी परंपरा,आस्था,हक अधिकार को संरक्षित करने के उद्देश्य से किया गया है। जनजातीय समाज के लोग धर्म परिर्वतन करके एसटी के तहत मिलने वाले आरक्षण के साथ साथ अल्पसंख्यक के अधिकार का भी लाभ ले रहे हैं। उस रोकना है और समाज के हक और अधिकार को बचाना है।
रांची के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ एचपी नारायण ने कहा कि 70 साल से जनजाति समाज का हक दूसरे लोग उठा रहे है और आप सब अहिंसा का पालन करते हुए सहते आ रहे हैं।लेकिन अब जागना होगा अपने हक अधिकार,धर्म को समझना होगा। सबसे पुरानी पूजा पद्धति की पुजारी आप सब हैं। इसे बचाना होगा।