रांची। गत दिनों कोयला तस्करी के खिलाफ घाटो में हजारीबाग डीआइजी की विशेष टीम छापेमारी करने गयी थी। उस क्रम में उसने एक ट्रैक्टर को पकड़ा, जिसमें अवैध कोयला लदा था। पुलिस की टीम उस ट्रैक्टर को लेकर जा ही रही थी कि अचानक कोयला तस्करों ने टीम को घेर लिया। पुलिस टीम का कहना था कि इस क्रम में जानकी महतो के नेतृत्व में भीड़ ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया। पुलिसकर्मियों से धक्का-मुक्की के साथ जोर-जबरदस्ती भी की गयी और ट्रैक्टर को पुलिस की पकड़ से छुड़ा लिया गया। इसका सबसे चिंतनीय पहलू यह है कि यह घटना घाटो थाना से कुछ दूरी पर हुई थी। पुलिस टीम ने इस बात की सूचना घाटो थाना को भी दी थी। पुलिस टीम तो उस समय वहां पहुंची नहीं, उलटे जब वह टीम वहां से कुछ दूर गयी, तो दोबारा कोयला तस्करों ने उस टीम पर हमला कर दिया और लाठी-डंडे से पुलिस की गाड़ी को क्षतिग्रस्त कर दिया। पुलिस टीम को वहां से जान बचा कर भागना पड़ा। कोयला तस्करों ने पुलिस टीम में शामिल जवानों से कहा कि एक तरफ पुलिस हमसे पैसा भी लेती है, और दूसरी तरफ छापेमारी भी करती है, यह नहीं हो सकता।
इस घटना में घाटो पुलिस की जो भूमिका सामने आयी है, वह पुलिसिया महकमा के लिए बहुत ही खतरनाक है। पुलिस टीम से जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक जब उस पर कोयला तस्करों ने हमला किया, तो टीम ने इस बात की जानकारी घाटो के तत्कालीन थानेदार को दी थी। बता दें कि उस थानेदार की अब घाटो से बदली हो चुकी है। जानकारी देने के डेढ़ घंटे बाद पुलिस तब वहां पहुंची, जब कोयला तस्करों ने ट्रैक्टर को टीम से मुक्त करा लिया और उन्हें जान बचा कर भागने के लिए मजबूर कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम में यह बात उल्लेखनीय है कि घाटो पुलिस ने जानबूझ कर कोयला तस्करों को उकसाया। सूचना तो यहां तक मिल रही है कि जब कोयला तस्करों ने घाटो पुलिस के अधिकारी से इस छापेमारी के बारे में पूछा, तो उन्होंने साफ कह दिया कि जो छापेमारी करने गये हैं, वे घाटो थाना के पुलिसकर्मी नहीं हैं। हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। यह बात सुनते ही कोयला तस्कर आक्रामक हो गये और टीम के ऊपर हमला कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम में घाटो पुलिस की संदिग्ध भूमिका इसलिए भी सामने आ रही है, क्योंकि जिस जानकी महतो के नेतृत्व में पुलिस टीम पर हमला करने की बात पुलिस टीम ने कही थी, वह आज तक पुलिस पकड़ से दूर है। घाटो पुलिस ने अब तक उसे गिरफ्तार नहीं किया है। खानापूर्ति के नाम पर उसने दो अन्य लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और मामले की इतिश्री कर दी।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक डीआइजी की टीम जब छापेमारी करने पहुंची, तो उसकी सूचना कोयला तस्करों को पहले ही मिल गयी थी। उन्हें इस बात की भी सूचना थी कि यह टीम घाटो की नहीं है, लिहाजा उन्होंने पुलिस टीम को सबक सिखाने की ठानी और उस पर जानलेवा हमला कर दिया। यही नहीं, कुछ पुलिसकर्मियों ने घाटो में यह सूचना भी फैला दी कि वह टीम वसूली करने के ध्येय से वहां आयी थी, इसीलिए छापेमारी की सूचना लोकल पुलिस को नहीं दी। यहां तक बात फैली कि वरीय अधिकारी थाना पुलिस पर डिमांड के लिए दबाव बना रहे हैं। चर्चा होने लगी कि पुलिसकर्मियों के पास फोन आते हैं और डिमांड होने लगती है।
इस घटनाक्रम ने वरीय अधिकारियों और स्थानीय थाना पुलिस के बीच मनमुटाव की बात उजागर कर दी है। पुलिस भी दो खेमों में बंटी हुई नजर आ रही है। स्थानीय कोयला तस्कर भी दो ग्रुप में विभक्त हो गये हैं। दोनों ही तरफ से एक दूसरे के खिलाफ शिकायतें की जा रही हैं। हर कोई अपने को दूध का धुला कह रहा है और दोष दूसरों पर लगा रहा है। लेकिन एक बात तो स्पष्ट है कि बगैर पुलिस की मदद और सहभागिता के कोयला और बालू की तस्करी संभव ही नहीं है। पुलिस से सिग्नल मिलने के बाद ही कोयल तस्कर सक्रिय होते हैं और पुलिस की दबिश के पास भूमिगत हो जाते हैं। यह भी तय है कि स्थानीय पुलिस को अधिकारियों के एक वर्ग से सह मिलती है। इसीलिए जब कोई ऊपर से कार्रवाई होती है, तो स्थानीय पुलिस बेचैन हो जाती है और तिलमिला जाती है।
घाटो में हुई छापेमारी में भले ही मुख्य साजिशकर्ता जानकी महतो पुलिस की गिरफ्त में नहीं आया हो, लेकिन इन दिनों वहां कोयला की तस्करी रूक गयी है। यह अलग बात है कि कोयला तस्कर एक बार फिर स्थानीय पुलिस से सेटिंग करने में लगे हैं, लेकिन अभी तक उन्हें सफलता नहीं मिली है। यह भी तय है कि घाटो में कोयला तस्करी बहुत दिनों तक रूकनेवाली नहीं है, क्योंकि पुलिस की कमाई का वह बहुत बड़ा स्रोत है। इन दिनों पूरे झारखंड में अवैध कोयला और अवैध बालू तस्करी ही कमाई का मुख्य जरिया बन गया है। जब बात फैलती है, तो कुछ दिनों के लिए इस पर विराम लग जाता है और जब मामला शांत हो जाता है, तो कोयला तस्कर फिर सक्रिय हो जाते हैं।
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