काठमांडू। राजधानी में राजसंस्था की पुनर्स्थापना की मांग को लेकर शुक्रवार को हुए प्रदर्शन के दौरान भीड़ द्वारा तीन राजनीतिक दलों के मुख्यालय पर भी हमला किया गया। इनमें से एक दल के मुख्यालय में आगजनी भी की गई, जबकि समय पर सुरक्षाबलों के आ जाने से दो पार्टी मुख्यालय में आगजनी से बचाया जा सका।
काठमांडू जिला प्रशासन के तरफ से कर्फ्यू आदेश जारी होने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने कुछ घंटों तक जमकर बवाल काटा। प्रदर्शनस्थल से वापस हो रहे राजशाही समर्थकों ने रास्ते में कई भवनों पर पथराव करने, आगजनी करने और वाहनों को फूंकने का काम किया। इसी क्रम में उन्होंने राजनीतिक दल के दफ्तरों को भी निशाना बनाया। पुलिस द्वारा बल प्रयोग किए जाने से नाराज उग्र भीड़ ने पहले तो एकीकृत समाजवादी पार्टी के मुख्यालय में तोड़फोड़ करते हुए आग लगा दी। पार्टी के अध्यक्ष माधव कुमार नेपाल ने बताया कि बाहर से पथराव करने वाले प्रदर्शनकारी दफ्तर का दरवाजा तोड़ कर अंदर घुस गए और फर्नीचर के आग लगा दी। उन्होंने बताया भूतल पर रहे दफ्तर के कमरों के सभी फर्नीचर के आग लगाने के अलावा वहां रहे पार्टी के दस्तावेज, फाइल आदि के भी आगजनी कर दी।
इसके बाद थोड़ी दूर पर रहे माओवादी हेडक्वार्टर के तरफ भीड़ बढ़ी। वहां पथराव तो जरूर हुआ, लेकिन आगजनी का प्रयास सफल नहीं हुआ। माओवादी की प्रवक्ता पंगा भुसाल ने कहा कि पथराव के कारण पार्टी मुख्यालय के कई दरवाजे और खिड़की में लगे कांच के दरवाजे और शीशे टूट गए हैं। पार्टी ने इस घटना की निंदा की है। इसी तरह प्रधानमंत्री केपी ओली की पार्टी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी-एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादी के मुख्यालय में भी आक्रमण का प्रयास किया गया, लेकिन वहां पर समय रहते भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात कर दिया गया था। पार्टी के महासचिव शंकर पोखरेल ने कहा कि अनियंत्रित भीड़ के पार्टी दफ्तर पर आने की सूचना पहले ही मिलने के कारण किसी तरह का नुकसान नहीं हो पाया। लेकिन दूर से ही प्रदर्शनकारियों के तरफ से पार्टी मुख्यालय पर हुए पथराव के कारण करीब दर्जन भर गाड़ियों के शीशे टूट गए है।