पटना। बिहार की राजनीति में एक युग का अंत हो रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना की गद्दी छोड़कर केंद्र की राजनीति में जाने का मन बना लिया है। उन्होंने राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है, जिसके बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? इस बार पहली बार ऐसा हो सकता है कि बिहार की कमान पूरी तरह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हाथों में आ जाए।
चार दिग्गजों के नाम पर चर्चा
भाजपा अपने चौंकाने वाले फैसलों के लिए जानी जाती है और इस बार मुख्यमंत्री पद की रेस में चार दिग्गज नेताओं के नाम सबसे आगे चल रहे हैं – सम्राट चौधरी, दिलीप जायसवाल, नित्यानंद राय और संजीव चौरसिया। खास बात यह है कि ये चारों नेता ओबीसी समुदाय से आते हैं। सम्राट चौधरी कोइरी समाज से हैं, जिनका राज्य में बड़ा वोटबैंक है। नित्यानंद राय यादव समुदाय से हैं, जो बिहार की सबसे बड़ी आबादी वाला पिछड़ा वर्ग है। दिलीप जायसवाल कलवार और संजीव चौरसिया वैश्य समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं।
भाजपा की रणनीति
नीतीश कुमार के जाने के बाद भाजपा को उनके लव-कुश समीकरण और अति-पिछड़ा वोटबैंक को अपनी ओर खींचना जरूरी है। अगर पार्टी किसी सवर्ण को मुख्यमंत्री बनाती है, तो विपक्षी दल इसे पिछड़ा विरोधी बताकर मुद्दा बना सकते हैं। इसीलिए भाजपा अपनी सवर्ण पार्टी वाली छवि को तोड़कर पिछड़ों और अति-पिछड़ों के बीच अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है। नीतीश कुमार के रहते भाजपा को कभी पिछड़ा वर्ग के नेतृत्व की चिंता नहीं करनी पड़ी, क्योंकि नीतीश खुद ओबीसी का बड़ा चेहरा थे। अब उनके जाने के बाद भाजपा को एक ऐसा चेहरा चाहिए जो नीतीश की कमी को पूरा कर सके। अब देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इन चार नामों में से किसे ताज पहनाती है या फिर कोई पांचवां सरप्राइज नाम सामने आता है।

