रांची। हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ प्रखंड स्थित कोसुंभा गांव में 12 वर्षीय नाबालिग के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या के सनसनीखेज मामले ने झारखंड हाइकोर्ट का गंभीर संज्ञान ले लिया है। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस घटना को घृणित और मानवता को शर्मसार करने वाला बताते हुए स्वत: संज्ञान लिया। कोर्ट ने राज्य के डीजीपी, गृह सचिव और हजारीबाग एसपी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। खंडपीठ ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए चीफ जस्टिस के पास भेज दिया है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष अखबार की कटिंग पेश की गई, जिसमें इस मामले की तुलना दिल्ली के निर्भया कांड से की गई थी। कोर्ट को बताया गया कि बच्ची के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया और उसके प्राइवेट पार्ट को भी निशाना बनाया गया। इस पर कोर्ट ने तुरंत झालसा सचिव और हजारीबाग एसपी को वर्चुअल तलब कर लिया। कोर्ट को जानकारी दी गई कि यह घटना 24 मार्च को हुई और प्राथमिकी 25 मार्च को दर्ज की गई। देर से प्राथमिकी दर्ज करने पर हाइकोर्ट ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
वर्चुअल माध्यम से उपस्थित हजारीबाग एसपी से कोर्ट ने सख्ती से पूछताछ की। कोर्ट ने पूछा कि छह दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी आरोपी को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया? क्या मृतिका के कपड़े और अन्य साक्ष्य फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं? कोर्ट ने कहा कि पांच दिन की देरी से फॉरेंसिक जांच प्रभावित हो सकती है। एसपी ने बताया कि अनुसंधान जारी है और मोबाइल लोकेशन के आधार पर आरोपी को पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि समाचार पत्रों के माध्यम से यह घटना सामने नहीं आती, तो अदालत तक इसकी जानकारी नहीं पहुंच पाती।

