रांची: झारखंड विधानसभा ने केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा के स्थान पर लाए जा रहे VB-GRAM-G अधिनियम के खिलाफ सर्वसम्मति से ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया है। ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने यह प्रस्ताव पेश करते हुए साफ कर दिया कि झारखंड गरीबों के रोजगार के अधिकार से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा। देश में संभवतः यह पहला राज्य है जिसने विधानसभा से इस नई योजना के विरोध में प्रस्ताव पारित किया है।
प्रस्ताव में केंद्र से मांग की गई है कि मनरेगा को ही जारी रखा जाए और रोजगार के दिनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 150 दिन की जाए। मंत्री ने सदन को बताया कि पांच जनवरी 2026 को आयोजित समीक्षा बैठक में उप विकास आयुक्त, प्रखंड विकास पदाधिकारी और पंचायत प्रतिनिधियों सहित सभी हितधारकों ने VB-GRAM-G के प्रावधानों पर गंभीर चिंता जताई थी।
मनरेगा बनाम VB-GRAM-G: क्यों झारखंड ने ठोका तीर?
समीक्षा में सामने आया कि VB-GRAM-G अधिनियम के कई प्रावधान ग्रामीण गरीबों और राज्य के हितों के खिलाफ हैं। नए अधिनियम में रोजगार की कानूनी गारंटी को समाप्त कर दिया गया है, जो मनरेगा की सबसे बड़ी ताकत थी। महिला सशक्तिकरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने और पलायन की समस्या बढ़ने की आशंका जताई गई है।
सबसे बड़ा झटका राज्य के वित्त को लगेगा। मनरेगा में जहां 90:10 का अनुपात था (90% केंद्र, 10% राज्य), वहीं VB-GRAM-G में 60:40 का प्रावधान है। यानी राज्य पर 40% वित्तीय बोझ पड़ेगा, जो झारखंड जैसे राज्य के लिए असंभव है।
PESA क्षेत्रों की ग्रामसभाओं को 266 तरह के काम करने का अधिकार था, जो नए अधिनियम में समाप्त हो जाएगा। खेती के मौसम में 60 दिनों तक काम नहीं मिलने से भूमिहीन मजदूरों की हालत खराब होगी। बायोमेट्रिक्स और जियो-स्पेशियल निगरानी से सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी समस्या पैदा होगी, जिससे मजदूरों को समय पर भुगतान नहीं हो सकेगा।
गांधी के नाम से छेड़छाड़ अस्वीकार्य
प्रस्ताव में कहा गया है कि महात्मा गांधी का नाम हटाना उस दर्शन को कमजोर करना है जो अंतिम व्यक्ति के उत्थान की बात करता है। ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “मनरेगा पर कोई भी हमला, गरीबों के अधिकारों और उनके सम्मान पर सीधा प्रहार है। झारखंड इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा।”
उन्होंने कहा कि मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि करोड़ों ग्रामीण परिवारों के जीवनयापन, सम्मान और सुरक्षा की गारंटी है। कांग्रेस, झामुमो, राजद सहित इंडिया गठबंधन के सभी दल लगातार इसका विरोध करते आ रहे हैं और सड़क पर भी उतरे हैं।
क्या है VB-GRAM-G?
केंद्र सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर ‘विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) – VB-GRAM G Act, 2025’ कर दिया है। इसमें राज्यों की हिस्सेदारी 10% से बढ़ाकर 40% कर दी गई है और रोजगार के दिनों की संख्या 100 ही रखी गई है, जबकि झारखंड 150 दिनों की मांग कर रहा है।
झारखंड सरकार ने यह प्रस्ताव केंद्र को भेजने का निर्णय लिया है और साफ कर दिया है कि वह ग्रामीण श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर अपनी आवाज बुलंद करेगी।

