मधेपुरा। विश्व स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध के प्रभाव अब बिहार के मधेपुरा जिले में भी दिखाई देने लगे हैं। यहां रसोई गैस सिलेंडर की किल्लत से आम लोगों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो रही है। शहर की विभिन्न गैस एजेंसियों पर सुबह से ही उपभोक्ताओं की लंबी कतारें लग रही हैं, लेकिन सैकड़ों लोगों को खाली हाथ वापस लौटना पड़ रहा है।
एजेंसियों पर उमड़ रही भारी भीड़
मेजर योगेंद्र गैस एजेंसी सहित शहर की अन्य एजेंसियों पर इन दिनों अभूतपूर्व भीड़ देखने को मिल रही है। गैस लेने के लिए लोग सुबह सुबह लाइन में लग जाते हैं, लेकिन कई उपभोक्ताओं को कई-कई दिनों तक इंतजार करने के बावजूद सिलेंडर नसीब नहीं हो रहा है। इससे घरेलू रसोई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और लोगों को खाना बनाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह हो गए हैं कि कई परिवार लकड़ी और वैकल्पिक ईंधन का सहारा लेने को मजबूर हो गए हैं।
उपभोक्ताओं की बढ़ रही परेशानी
गैस लेने पहुंचे विवेकानंद यादव ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि वे पिछले पांच दिनों से लगातार एजेंसी का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लग रही है। उनकी मानें तो हर सुबह उम्मीद लेकर आते हैं और शाम को खाली हाथ घर लौटते हैं। वहीं अमिश यादव ने बताया कि चार दिनों से उनके घर में गैस खत्म है, जिससे परिवार के लिए खाना बनाना मुश्किल हो गया है। उपभोक्ताओं का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल-गैस की अस्थिरता और युद्ध के हालात के कारण लोगों में डर बैठ गया है, जिससे एक साथ बड़ी संख्या में लोग गैस भरवाने पहुंच रहे हैं।
कंपनियों का दावा, जमीनी हकीकत अलग
हालांकि गैस वितरण कंपनियों का दावा है कि आपूर्ति में कोई कमी नहीं है और पर्याप्त मात्रा में गैस उपलब्ध है। लेकिन जमीनी स्तर पर दिख रही तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। एजेंसियों पर लगी लंबी कतारें और उपभोक्ताओं की बढ़ती शिकायतें इस दावे पर सवाल खड़े कर रही हैं।
प्रशासन से लगाई गुहार
शहरवासियों ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि गैस की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और एजेंसियों पर भीड़ नियंत्रित करने के लिए उचित व्यवस्था की जाए। इस संबंध में अब तक जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे उपभोक्ताओं की परेशानी और बढ़ गई है।

