कसौली (हिमाचल प्रदेश): देश में इंडीपॉप और जैज म्‍यूजिक को सफल बनाने में उषा उत्थुप का बेहद अहम योगदान है। उनकी दमदार आवाज उनकी पहचान है, लेकिन उनके करियर के शुरुआत में एक दौर ऐसा भी था जब उन्हें अपनी आवाज को लेकर खासी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था।

वह सिर्फ गाना चाहती थीं और उनके इसी जुनून ने उनके आलोचकों का मुंह बंद कर दिया। उषा हिंदी से लेकर तमिल, अंग्रेजी और फ्रांसीसी सहित कुल 17 भाषाओं में गा सकती हैं और वह कहती हैं कि उन्होंने कभी भाषा को अपने करियर में आड़े नहीं आने दिया।

क्लब सिंगर के रूप में संगीत की पारी शुरू कर स्टेज सिंगिग को देश में लोकप्रिय बनाने वालों में उषा भी शुमार हैं। ‘दोस्तों से प्यार किया’, ‘रंबा हो हो हो’ और ‘डार्लिग’ जैसे धुंआधार गानों से छाप छोड़ चुकीं उषा उत्थुप का पहला प्यार रेडियो रहा है। उनका मानना है कि वीडियो कभी भी ऑडियो की जगह नहीं ले सकता।

उन्होंने कसौली में रिदम एंड ब्लूज महोत्सव 2017 से इतर आईएएनएस के साथ साक्षात्कार में कहा, “रेडियो मेरा पहला प्यार है और मेरा मानना है कि वीडियो कैन नेवर कील्ड रेडियो। रेडियो का चार्म अब भी बरकरार है। लोग अब भी गाने सुनने के लिए टीवी के बजाए रेडियो सुनना पसंद करते हैं।”

उषा की आवाज के देश में ही नहीं इंटरनेशनल लेवल पर भी कम दीवाने नहीं हैं। उनकी आवाज उनकी पहचान बन गई है।वह कहती हैं, “मैंने जब शुरुआत में गाना शुरू किया तो मेरी आवाज के भारीपन और वाइब्रेंट अंदाज की खासा आलोचना हुई थी। लीक से हटकर प्रचलन में आई चीजों को शुरू में विरोध का सामना करना पड़ता है। मुझसे फैमिनिन अंदाज में गाने की उम्मीद की जाती थी, लेकिन जो और जैसा मैं गा सकती थी, मैंने गाया। मैंने अपनी इसी कमजोरी को अपनी ताकत बना ली। खुश हूं कि लोगों ने मेरी आवाज को पसंद किया।”

उषा पिछले 47 वर्षो से संगीत के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इस दौरान इंडस्ट्री में कई बड़े बदलाव हुए हैं, जिसे लेकर उनका रुख उम्मीदों से भरा हुआ है। उषा कहती हैं, “मैं पिछले 47 वर्षो से इस क्षेत्र में हूं और इस दौरान कई बदलाव देखने को मिले हैं। देश की युवा पीढ़ी काफी प्रतिभाशाली है और इंडस्ट्री में एक से बढ़कर एक प्रतिभाएं देखने को मिल रही हैं। मैं तो मानती हूं कि जिसमें प्रतिभा है वह टिका रहेगा, बाकी सब दौड़ से बाहर हो जाएंगे।”

उषा की दमदार आवाज के साथ उनकी सिल्क साड़ी और बड़ी-सी बिंदी भी खासा चर्चा में रही है। अपने इस लुक के बारे में वह कहती हैं, “इंडस्ट्री में मुझे इतना समय हो गया है, लेकिन अभी भी लोग मेरे लुक के बारे में पूछते हैं और मैं बस इतना कहती हूं कि मैं एक मध्यमवर्गीय दक्षिण भारत परिवार में पली-बढ़ी हुई हूं। मुझे पहनावे में साड़ी से आगे कुछ सूझता नहीं। यही मेरी पहचान है।”

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