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    Home»Top Story»राफेल विवाद में नया मोड़, फ्रांसीसी अखबार का दावा
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    राफेल विवाद में नया मोड़, फ्रांसीसी अखबार का दावा

    azad sipahi deskBy azad sipahi deskApril 13, 2019No Comments3 Mins Read
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    एजेंसी
    नयी दिल्ली। फ्रांसीसी अखबार लू मुंद की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फ्रांस ने राफेल डील के ऐलान के बाद अनिल अंबानी की कंपनी के 14.37 करोड़ यूरो (करीब 1125 करोड़ रुपये) के टैक्स को माफ किया था। लु मुंद की शनिवार को प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के 36 राफेल विमान खरीदने के ऐलान के कुछ महीने बाद ही 2015 में फ्रांस सरकार ने रिलायंस कम्यूनिकेशन की फ्रांस में रजिस्टर्ड टेलिकॉम सब्सिडियरी के टैक्स को माफ कर दिया।
    रिलायंस की सफाई, कांग्रेस का हमला, रक्षा मंत्रालय की प्रतिक्रिया
    दूसरी तरफ, रिलायंस कम्यूनिकेशन ने फ्रांसीसी अखबार की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए किसी भी तरह की अनियमितता को खारिज किया है। आरकॉम ने कहा है कि टैक्स विवाद को उन कानूनी प्रावधानों के तहत हल किया गया, जो फ्रांस में संचालित सभी कंपनियों के लिए उपलब्ध हैं।
    इस बीच, रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि राफेल डील और टैक्स मसले को एक साथ जोड़ कर देखना पूरी तरह गलत, पक्षपातपूर्ण होने के साथ-साथ गुमराह करने की शरारती कोशिश है।
    वहीं, कांग्रेस ने फ्रांसीसी अखबार की रिपोर्ट के बाद एक बार फिर पीएम मोदी पर हमला बोला है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि ‘मोदी कृपा’ से फ्रांस की सरकार ने अनिल अंबानी की कंपनी के अरबों रुपये का टैक्स माफ किया।
    रिलायंस फ्लैग ने टैक्स सेटलमेंट के तहत करीब 57 करोड़ चुकाये: फ्रांसीसी अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फ्रांस के टैक्स अधिकारियों ने रिलायंस फ्लैग अटलांटिक फ्रांस से निपटारे के रूप में 73 लाख यूरो (करीब 57.15 करोड़ रुपये) स्वीकार किये, जबकि मूल डिमांड 15.1 करोड़ यूरो (करीब 1182 करोड़ रुपये) की थी। रिलायंस फ्लैग का फ्रांस में टेरेस्ट्रियल केबल नेटवर्क और दूसरे टेलिकॉम इन्फ्रास्ट्रक्चर पर स्वामित्व है।
    10 अप्रैल 2015 को पीएम मोदी ने किया था राफेल खरीद का ऐलान
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तत्कालीन फ्रांसीसी राष्टÑपति फ्रांस्वा ओलांद के साथ बातचीत के बाद 10 अप्रैल 2015 को पेरिस में 36 राफेल लड़ाकू विमानों को खरीदने का ऐलान किया था। राफेल पर अंतिम डील 23 सितंबर 2016 को हुई थी। मुख्य विपक्षी कांग्रेस इस डील में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाती रही है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार एक राफेल जेट को 1,670 करोड़ रुपये में खरीद रही है, जबकि यूपीए के दौरान जब डील पर बात हुई थी, तब एक विमान की कीमत 526 करोड़ रुपये तय हुई थी। हालांकि, यूपीए शासन काल में राफेल को लेकर सिर्फ बातचीत हुई थी, कोई डील नहीं।
    अनियमितता और अंबानी को फायदा पहुंचाने के आरोप
    विमान की कीमत के अलावा कांग्रेस अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस को दसॉ एविएशन के आॅफसेट पार्टनर चुने जाने को लेकर भी सरकार पर हमला करती रही है। दसॉ ही राफेल विमानों को बनाती है। दूसरी तरफ, सरकार कांग्रेस के आरोपों को खारिज करती रही है। सरकार का कहना है कि यह डील किसी कंपनी की बजाय दोनों देशों की सरकारों के बीच हुई है, जिसमें भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है। रिलायंस डिफेंस को आॅफसेट पार्टनर बनाये जाने के सवाल पर सरकार का कहना है कि यह दसॉ का फैसला है, वह जिसे चाहे आॅफसेट पार्टनर बनाये। इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं है।
    फ्रांस के टैक्स अधिकारियों ने की थी रिलायंस फ्लैग की जांच : फ्रांसीसी अखबार के मुताबिक फ्रांस के टैक्स अधिकारियों ने रिलायंस फ्लैग की जांच की थी और पाया कि कंपनी पर 2007 से 2010 के दौरान छह करोड़ यूरो (करीब 470 करोड़ रुपये) की टैक्स देनदारी बनती है। हालांकि, रिलायंस ने सेटलमेंट के लिए सिर्फ 76 लाख यूरो (करीब 59.5 करोड़ रुपये) की पेशकश की थी।

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