चार मोर्चों पर एक साथ जूझ रही है राज्य सरकार

आजाद सिपाही विशेष
वैश्विक महामारी कोरोना से जंग लड़ रहे भारत के 130 करोड़ लोगों में कम से कम सवा तीन करोड़ ऐसे लोग हैं, जिन्हें लॉकडाउन के दो सप्ताह बाद अब लगने लगा है कि उनकी सरकार उन्हें इस खतरनाक बीमारी से महफूज रखने में सफल हो रही है। ये सवा तीन करोड़ लोग झारखंड के हैं। जो लोग झारखंड के विभिन्न हिस्सों में रह रहे हैं या देश के दूसरे हिस्सों में फंसे हुए हैं, उन्हें इस बात की भी चिंता नहीं है कि लॉकडाउन की अवधि में उन्हें खाना या राशन कैसे मिलेगा। इसका पूरा श्रेय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी ‘टीम झारखंड’ को जाता है, क्योंकि कोरोना के खिलाफ जंग में अब तक उन्होंने झारखंड को कमोबेश महफूज रखा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी टीम के साथ मिल कर ऐसी मजबूत किलेबंदी की है, जिसके कारण झारखंड में इस बीमारी का संक्रमण अब तक बहुत अधिक नहीं फैल सका है। इतना ही नहीं, दो सप्ताह के लॉकडाउन के बाद भी अब तक कहीं से यह शिकायत नहीं मिली है कि राज्य का कोई व्यक्ति भूखा है या उसके पास राशन नहीं है। यहां तक कि स्कूली बच्चों को मिलनेवाला मिड डे मील अनाज के रूप में उनके घरों तक पहुंच रहा है। राज्य का हर व्यक्ति सरकार की कोशिशों से संतुष्ट नजर आ रहा है। कोरोना से जंग में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मजबूत किलेबंदी पर आजाद सिपाही ब्यूरो की खास रिपोर्ट।

31 मार्च से पहले तक खतरनाक कोरोना वायरस के संक्रमण से अछूता रहनेवाले झारखंड में जब पहला संक्रमित मरीज मिला, तो लोगों के मन में यह आशंका घर करने लगी थी कि अब यह बीमारी तेजी से फैलेगी। लेकिन अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ। सात अप्रैल को जब चौथा मरीज मिला, तब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि चिंता की कोई जरूरत नहीं है। हम इस संकट से निबटने के लिए हम पूरी तरह तैयार हैं। जब वह यह कह रहे थे, तब उनका बॉडी लैंग्वेज आत्मविश्वास से भरा लग रहा था। यह उस मुख्यमंत्री का बयान था, जिसने झारखंड की सवा तीन करोड़ आबादी को अब तक इस खतरनाक संक्रमण से बचा कर रखा हुआ है। मुख्यमंत्री के बयान से लोगों में भरोसा जगा और उन्हें अब लगने लगा है कि उनकी सरकार वास्तव में इस जंग में प्राण-प्रण से जुटी है।
झारखंड में कोरोना का संक्रमण देश के दूसरे हिस्सों की तरह बेकाबू नहीं हुआ है, इसके पीछे सोरेन सरकार की मजबूत किलेबंदी ही है। वह अपनी ‘टीम झारखंड’ के साथ झारखंड को इस संक्रमण से महफूज रखने के लिए तत्परता से लगे हुए हैं। हेमंत ने झारखंड को एक ऐसे किले के रूप में तब्दील कर दिया है, जिसे भेद पाना इस संक्रमण के लिए अब तक मुश्किल हो रहा है। जैसा कि सभी जानते हैं कि कोरोना के संक्रमण का कोई इलाज अब तक नहीं है। इससे सुरक्षित रहने का एकमात्र उपाय घर में रहना और सोशल डिस्टेंसिंग है, यानी एक जगह बहुत से लोगों को जमा नहीं होना है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बचाव के इस उपाय के प्रति झारखंड के लोगों को बखूबी जागरूक किया। इक्का-दुक्का शहरों को छोड़ दिया जाये, तो झारखंड में अब तक सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन बेहद सलीके से किया जा रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में संसाधनों की कमी का बखूबी अंदाजा है। वह जानते हैं कि सीमित संसाधनों में ही उन्हें इस चुनौती का सामना करना है। इसलिए उन्होंने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को उसी संसाधन में सुदृढ़ बना दिया है। कहीं कोई अफरा-तफरी या अव्यवस्था नहीं है। सब कुछ पूरी तरह सामान्य चल रहा है।
इसके बाद हेमंत के सामने चुनौती गरीबों और समाज के अंतिम व्यक्ति तक राहत पहुंचाने की। इसके लिए उन्होंने तीन मोर्चे खोले। पहले में उन्होंने वैसे गरीबों की ओर ध्यान दिया, जो राशन लेकर खाना बनाने में सक्षम थे। ऐसे सभी लोगों को राज्य सरकार की ओर से दो महीने का राशन एकमुश्त दिया जाने लगा। इसके अलावा उन्होंने मुख्यमंत्री कैंटीन की स्थापना की, जहां से लोगों को चूड़ा-गुड़ और चना जैसी खाद्य सामग्री दी जाने लगी। हेमंत के सामने दूसरी चुनौती शहरी इलाकों में रह रहे वैसे लोगों का पेट भरने की थी, जो राशन नहीं खरीद सकते थे। ऐसे लोगों के लिए उन्होंने पहले सामुदायिक किचेन की अवधारणा को धरातल पर उतारा और मुख्यमंत्री दाल-भात केंद्र से मुफ्त भोजन दिये जाने की शुरूआत की। इतना ही नहीं, उन्होंने पुलिस को भी इस काम में लगाया और थाना परिसरों में जरूरतमंदों के लिए भर पेट भोजन की व्यवस्था हो गयी। इसी दौरान सोशल मीडिया पर जब मुख्यमंत्री को ग्रामीण इलाकों में रहनेवाले लोगों की समस्या की जानकारी मिली, तो उन्होंने पंचायतों में मुख्यमंत्री दीदी किचेन की शुरूआत कर दी। इसका परिणाम यह हुआ कि झारखंड के किसी व्यक्ति के सामने पेट भरने की चिंता नहीं रही। मुख्यमंत्री को इस बात का आभास था कि सभी लोगों के लिए सामुदायिक किचेन तक पहुंचना संभव नहीं होगा। ऐसे लोगों के लिए उन्होंने उनके दरवाजे पर भोजन का पैकेट पहुंचाने की व्यवस्था की। आज राज्य सरकार की तरफ से हर दिन 10 लाख से अधिक लोगों को मुफ्त में खाना खिलाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कोरोना के खिलाफ जंग का तीसरा मोर्चा जिला प्रशासनों और जन प्रतिनिधियों की मदद से खोला। उन्होंने उपायुक्त से लेकर पंचायत समिति सदस्यों और वार्ड पार्षदों को तत्काल राहत के लिए नगद रकम उपलब्ध करायी। इससे राहत कार्यों में व्यवधान नहीं पड़ा। इसके बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने देश के दूसरे हिस्सों में फंसे झारखंड के लोगों की मदद के लिए एक और मोर्चा खोला। उन्होंने अलग-अलग राज्य सरकारों से समन्वय के लिए अलग-अलग अधिकारी प्रतिनियुक्त किये और खुद इस टीम की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। इसका परिणाम यह हुआ कि झारखंड के जो लोग देश के दूसरे हिस्सों में फंसे हैं, उन्हें भी राहत पहुंचायी जा रही है और वे घर लौटने के लिए लॉकडाउन खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस जंग में जिस तरह किलेबंदी की है, वह एक उदाहरण बन सकता है। झारखंड की सक्सेस स्टोरी पर केंद्र सरकार को चाहिए कि वह आगे बढ़ कर इसकी मदद करे। जो राज्य सरकार इतना अच्छा काम कर रही है, उसकी पीठ तो अवश्य ही थपथपायी जानी चाहिए, क्योंकि तब वह राज्य और अधिक उत्साह और ताकत से कोरोना के खिलाफ जंग में मजबूती से खड़ा रह सकेगा।

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