कोरोना वायरस से संबंधित चिकित्सा उपकरणों की खरीद पर केंद्र और राज्यों के बीच अब तनातनी चल रही है. कई मुद्दों पर उनकी राहें पहले से ही अलग-अलग होने के बीच अब चिकित्सा उपकरणों की खरीद ने दोनों के बीच तनातनी नए सिरे से बढ़ा दी है. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने जब राज्यों को कोरोना वायरस प्रबंधन के लिए व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों (पीपीई), एन95 मास्क और वेंटिलेटर जैसे महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरणों की खरीद नहीं करने का निर्देश दिया तो उन्होंने विरोध किया.
जैसे इतना ही पर्याप्त नहीं था, केंद्र ने राज्यों को यह भी कहा कि मंत्रालय इन उपकरणों समेत अन्य संबंधित सामान की केंद्रीयकृत खरीदारी कर राज्यों को बांटेगा.केंद्र ने कहा है कि वह राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में कोरोना वायरस के हालात पर नजर रखने के साथ राष्ट्रीय आपदा प्रबंध कानून के तहत इस महामारी से निपटने की कवायद कर रहा है. केंद्र ने देशभर में कोरोना वायरस से निपटने के लिए 15000 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं और वह चाहता है कि राज्यों को ये चिकित्सा उपकरण केंद्रीयकृत आधार पर मिले.
केंद्र ने इस सहायता के लिए शर्तें भी जोड़ी हैं. केंद्र सरकार ने देश के और विदेशी विक्रेताओं से इन्हें बड़े पैमाने पर खरीदने का ओदश दिया है. वह इन उपकरणों को आवश्यकता के आधार पर बांटेगा. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का यह निर्णय आपदा प्रबंधन कानून 2005 के तहत आवश्यक चिकित्सा उपकरण की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अधिकार प्राप्त समूह पर भी आधारित है. राज्यों से कोरोना वायरस प्रबंधन के लिए अपनी आवश्यकता की लिस्ट हर पखवाड़े देने को कहा गया है.
कुछ राज्यों ने केंद्र के निर्देश पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह जरूरत के समय परीक्षण किट, पीपीई, मास्क और यहां तक कि वेंटिलेटर प्रदान करने में भी असमर्थ है. केंद्र अभी भी खरीद की केंद्रीय प्रणाली बनाने में जुटा है क्योंकि पहले से उसके पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी. दूसरी बात यह है कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है और संघीय ढांचे में केंद्र को सहायता में कोई शर्त नहीं जोड़नी चाहिए. कुछ राज्यों को लगता है कि केंद्र उसके अधिकारों को हड़पना चाहता है और उसने इस बार एनडीएमए का इस्तेमाल किया है. एक राज्य के एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने दावा किया कि उन्होंने उपकरण खरीदने का आदेश दिया था, लेकिन केंद्र ने उन्हें 11वें घंटे में आदेश रद्द करने के लिए मजबूर कर दिया. छत्तीसगढ़ ने भी केंद्र के निर्णय पर सवाल उठाया है.
कुछ राज्य सरकारें जहां भी ये उपकरण आकस्मिक आधार पर उपलब्ध हैं, वहां से खरीद कर रही हैं. केंद्र ने कहा है कि उसने 49000 वेंटिलेटर, 2.5 करोड़ पीपीई, 10 करोड़ मास्क और अन्य उपकरण खरीदने का आदेश दिया है