चाईबासा : कोरोना संकट की इस घड़ी में देश भर में चिकित्सकों के ऊपर हो रहे हमले की बढ़ती घटना कोरोना से चिकित्सकों की मृत्यु पश्चात उनके शवों के साथ अपमानजनक व्यवहार एवं आइएमए के लगातार मांग के बावजूद सरकार द्वारा इन घटनाओं को रोकने के लिए केंद्रीय कानून नहीं लाने के विरोध में आइएमए दिल्ली, आइएमए झारखंड के आह्वान पर आइएमए पश्चिम सिंहभूम चाईबासा चिकित्सकों द्वारा निर्णय लिया गया कि 22 अप्रैल को सभी चिकित्सक एवं अस्पताल परिसर में मोमबती जलाकर राष्ट को सावधान करेंगे तथा 23 अप्रैल गुरूवार को सभी चिकित्सक अपने बांहो पर काली पट्टी लगाकर काम करते हुए काला दिवस के रूप में मनायेगें. इसको लेकर तैयारी शुरू कर दी गयी है. चिकितस्कों में इसको लेकर काफी गुस्सा देखा जा रहा है. दूसरी ओर, जमशेदपुर समेत तमाम जिलों में यहीं स्थिति है. सारे चिकित्सक आंदोलन के मूड में नजर आ रहे है. वे लोग सरकार के फैसले का विरोध कर रहे है.
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से कोविड 19 को देखते हुए केंद्रीय कानून लाने की अपील की है ताकि स्वास्थ्य कर्मचारियों और चिकित्सकों की सुरक्षा हो सके. इस डिमांड को केंद्र सरकार पूरा करने को तैयार नहीं है. कोरोना वीर बताकर सिर्फ घोषणाओं पर ही सरकार चल रही है, जिसका विरोध हो रहा है. इसके तहत आइएमए 22 अप्रैल को वाइट डे और 23 अप्रैल को ब्लैक डे मनाने की घोषणा कर दी है. चेन्नई में एक चिकित्सक की कोरोना वायरस से हुई मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार को भीड़ ने रोक दिया था. बाद में किसी तरह दो लोगों ने उनका अंतिम संस्कार किया था. इसके विरोध में देश भर के चिकित्सक 22 अप्रैल को रात आठ बजे मोमबत्ती जलाकर अपना विरोध जतायेंगे और 23 अप्रैल को काला दिवस मनायेंगे.