आजाद सिपाही संवाददाता
नयी दिल्ली। देश भर में कोरोना की दूसरी लहर की आपदा पर मंगलवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से इससे निबटने का नेशनल प्लान बताने को कहा। अदालत ने टीके की अलग-अलग कीमतों के औचित्य पर भी सवाल उठाया। उसने पूछा कि क्या इस आपदा से निपटने का मुख्य विकल्प केवल वैक्सीनेशन ही है। सुनवाई की शुरूआत में ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हमें लोगों की जिंदगियां बचाने की जरूरत है। जब भी हमें जरूरत महसूस होगी, हम दखल देंगे। राष्ट्रीय आपदा के समय हम मूकदर्शक नहीं बने रह सकते हैं। हम विभिन्न हाइकोर्ट की मदद की जिम्मेदारी निभाना चाहते हैं। इस मामले में उन अदालतों को भी अहम रोल निभाना है। इस मामले पर अब 30 अप्रैल को सुनवाई होगी।
केंद्र से पांच मुद्दों की जानकारी मांगी
अदालत ने केंद्र को पांच अलग-अलग मुद्दों की जानकारी देने को कहा। उसने आॅक्सीजन की आपूर्ति को लेकर केंद्र को मौजूदा स्थिति स्पष्ट करने को कहा। इसमें आॅक्सीजन की मात्रा, राज्यों की जरूरत, राज्यों को आवंटन का आधार और राज्यों की जरूरत को जानने के लिए अपनायी गयी प्रक्रिया की जानकारी मांगी है। इसके अतिरिक्त गंभीर होती स्वास्थ्य जरूरतों और कोविड बेड बढ़ाने को भी कहा।
अदालत ने रेमडेसिविर और फेवीप्रिविर जैसी जरूरी दवाओं की कमी को पूरा करने के लिए उठाये गये कदमों की जानकारी भी मांगी। अदालत ने कहा कि सभी को वैक्सीन लगाने के लिए कितनी वैक्सीन की जरूरत होगी और इन वैक्सीन के अलग-अलग दाम तय करने के पीछे क्या तर्क और आधार हैं, इसकी जानकारी देने को कहा। अदालत ने 18 साल से अधिक उम्र के लोगों के वैक्सीनेशन के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े मुद्दों के बारे में बताने को कहा।
पीएम खुद समस्याओं पर ध्यान दे रहे हैं : केंद्र
केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार उच्चतम स्तर पर इस मसले पर काम कर रही है। परेशानियां दूर करने के लिए प्रधानमंत्री खुद इसे देख रहे हैं। हम हालात को बहुत सावधानी से संभाल रहे हैं।
तमिलनाडु में वेदांता के प्लांंट को खोलने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश राष्ट्रीय संकट से गुजर रहा है, ऐसे में वेदांता में आॅक्सीजन बनाये जाने पर किसी तरह का राजनीतिक लड़ाई-झगड़ा नहीं होना चाहिए। अदालत ने तमिलनाडु के तूतीकोरिन स्थित वेदांता के आॅक्सीजन प्लांट को दोबारा खोलने की मंजूरी दे दी। अदालत ने देश की जरूरत को देखते हुए यह फैसला लिया। वेदांता की ओर से कहा गया कि वहां 10 दिन में आॅक्सीजन का उत्पादन शुरू हो जायेगा। कोर्ट ने वेदांता को हिदायत भी दी है कि प्लांट खोलने के आॅर्डर की आड़ में वह तांबा का उत्पादन नहीं कर सकती है। यह प्लांट विभिन्न कारणों से 2018 से बंद है।
गिद्ध मत बनें आॅक्सीजन कंपनियां : हाइकोर्ट
दिल्ली में आॅक्सीजन के संकट के बीच इसकी कालाबाजारी को लेकर हाइकोर्ट ने केजरीवाल सरकार को फटकार लगायी। कोर्ट ने कहा कि कुछ सौ रुपये के आॅक्सीजन सिलेंडर लाखों रुपये में बेचे जा रहे हैं। कोर्ट ने पेश हुई आॅक्सीजन बनाने वाली एक कंपनी से कहा, यह गिद्धों की तरह बर्ताव करने का समय नहीं है। हाइकोर्ट ने दिल्ली सरकार के रवैये पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि हर तरफ सिर्फ गड़बड़ी है और आप उसे ठीक करने में नाकाम साबित हो रहे हैं। आप दिल्ली में सरकार चला रहे हैं। हालात सुधारने की जिम्मेदारी भी आपकी है। उसने कहा कि जो लोग आॅक्सीजन की कालाबाजारी कर रहे हैं, सरकार उनके प्लांट का अधिग्रहण करे।