मौके पर संघ के सचिव सुबोध कुमार जायसवाल ने नई उत्पाद नीति को महज एक दिखावा बताते हुए इसे लूट खसोट की नीति बतायी है। उन्होंने बताया कि खुदरा शराब दुकानदारों को मांग के अनुरूप ना तो पॉपुलर ब्रांड की बियर और विदेशी-देशी शराब की आपूर्ति की जा रही है और ना ही थोक विक्रेताओं के पास लोकप्रिय ब्रांड की बियर और विदेशी-देशी शराब उपलब्ध है।
खुदरा लाइसेंसधारियों को उनके द्वारा की जा रही मांग के अनुसार शराब की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इसकी वजह से उनका व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। उन्होंने बताया कि विभिन्न जिलों से आए शराब व्यापारियों ने अपनी समस्या उत्पाद सचिव विनय कुमार चौबे के समक्ष रखा। उन्हें बताया गया कि अप्रैल माह में उठे हुए कोटा पर ही राजस्व ली जाए। कारण यह है कि अब 30 अप्रैल तक ही दुकानों में पड़ी हुई शराब वैध होंगी। 30 अप्रैल के बाद अवैध घोषित हो जाएंगी। अभी तक व्यापारियों के लाइसेंस की अवधि 30 अप्रैल तक ही है। अब माल की सप्लाई होने पर भी कोई लाभ नहीं मिलना है। काफी नुकसान हो चुका है, इसलिए अप्रैल का जितना कोटा का उठाव हुआ है, उसी पर 25 अप्रैल को ईटीडी (एक्साइ ट्रांसपोर्ट ड्यूटी) लिया जाए। इस पर उत्पाद सचिव ने कहा है कि पूरे मामले को समझ कर राहत देने का फैसला करेंगे। विरोध प्रदर्शन में जमशेदपुर, हजारीबाग, रामगढ़, बोकारो सहित राज्य के कई जिलों के शराब व्यापारी उपस्थित थे।