सवाईमाधोपुर। सवाईमाधोपुर जिले में स्थित रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान में लापता बाघों का पता लगाने के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और राजस्थान हाई कोर्ट ने दो अलग-अलग कमेटियां बनाई हैं।
एनटीसी की दो सदस्यीय कमेटी रणथंभौर का दौरा कर जांच के बाद अपनी रिपोर्ट सरकार को देगी। एनटीसीए की कमेटी में एनटीसीए के डीआईजी शिवपाल सिंह और डब्ल्यूसीसीबी के संयुक्त निदेशक एचवीगिरिश शामिल हैं। डेढ़ दशक में रणथम्भौर से गायब बाघों को लेकर प्रकाशित खबरों पर संज्ञान लेते हुए राजस्थान हाई कोर्ट ने दो अधिवक्ताओं अभिषेक शर्मा और सुदेश कसाना को न्याय मित्र बनाया है। यह दोनों वनाधिकारियों से सवाल-जवाब कर अपनी रिपोर्ट न्यायालय को पेश करेंगे।
उल्लेखनीय है कि रणथंभौर में बाघों के लापता होने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई बाघ-बाघिन लापता हो चुके हैं। इनका आज तक कोई सुराग नहीं मिला है। रणथंभौर में बाघों की सुरक्षा और मॉनिटरिंग के लिए हर साल करोड़ों रुपये खर्च होते हैं।
वन विभाग के सूत्रों के अनुसार 2019 से जनवरी 2022 तक रणथम्भौर से 13 बाघ-बाघिन लापता हुए हैं। इनमें चार बाघिन और नौ बाघ शामिल है। इनमें बाघ टी 47, टी.42, टी 72, टी 62, टी 95, टी 6, टी 23, टी 126, टी 20, टी 64 आदि शामिल हैं। इसके अलावा बाघिन टी 92, टी 73, टी 97 व टी 100 शामिल है। इनमें टी 20 व टी 23 दोनों बाघ काफी उम्रदराज हैं और अपने उम्र के आखिरी पड़ाव पर थे। ऐसे में इनकी मौत होने की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता। बाघिन टी 92 रणथम्भौर के दूसरे डिवीजन करौली के जंगलों में विचरण करती थी।