सीबीआई के हीरक जयंती समारोह का उद्घाटन
भ्रष्टाचार के खिलाफ राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी नहीं
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को भ्रष्टाचार को न्याय और लोकतंत्र के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा बताया और कहा कि मुख्य रूप से सीबीआई की जिम्मेदारी देश को भ्रष्टाचार से मुक्त करना है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि आज देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की कोई कमी नहीं है। उन्होंने अधिकारियों से भ्रष्टाचारियों के खिलाफ बिना किसी हिचकिचाहट के कार्रवाई करने को कहा, चाहे वह कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के हीरक जयंती समारोह का उद्घाटन किया। केंद्रीय जांच ब्यूरो की स्थापना 1 अप्रैल 1963 को गृह मंत्रालय, भारत सरकार के एक संकल्प द्वारा की गई थी।
इस दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, `भ्रष्टाचार कोई सामान्य अपराध नहीं है, यह गरीबों के अधिकार छीनता है, यह कई अन्य अपराधों को जन्म देता है, भ्रष्टाचार न्याय और लोकतंत्र के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है।’ उन्होंने कहा कि सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार लोकतंत्र को बाधित करता है और सबसे पहले शिकार युवाओं के सपने होते हैं। भ्रष्टाचार भाई-भतीजावाद और एक वंशवादी व्यवस्था को बढ़ावा देता है जो देश की ताकत को कम करता है, गंभीर रूप से विकास को बाधित करता है।
उन्होंने भ्रष्टाचारियों की ताकत और उनके द्वारा जांच एजेंसियों को कलंकित करने के लिए बनाए गए तंत्र से विचलित नहीं होने को कहा। उन्होंने कहा कि `ये लोग आपका ध्यान भटकाते रहेंगे, लेकिन आपको अपने काम पर ध्यान देना होगा। किसी भी भ्रष्टाचारी को बख्शा नहीं जाना चाहिए। हमारे प्रयासों में कोई ढिलाई नहीं होनी चाहिए। यही देशवासियों की कामना है। देश, कानून और संविधान आपके साथ है।’
प्रधानमंत्री ने कहा कि दुर्भाग्य से भारत को आजादी के समय भ्रष्टाचार की विरासत मिली और इस तथ्य पर खेद व्यक्त किया कि इसे हटाने के बजाय कुछ लोग इस बीमारी को पोषित करते रहे। इस स्थिति ने व्यवस्था को बर्बाद कर दिया और नीतिगत पक्षाघात के माहौल ने विकास को ठप कर दिया। 2014 के सरकार की प्राथमिकता व्यवस्था में विश्वास जगाना रही है और इसके लिए सरकार ने मिशन मोड में काले धन और बेनामी संपत्ति के खिलाफ कार्रवाई की है।
प्रधानमंत्री ने जांच में देरी से पैदा हुई समस्याओं जैसे दोषियों को सजा में देरी और निर्दोषों को प्रताड़ित करने पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने प्रक्रिया को तेज करने, सर्वोत्तम अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं को अपनाने और भ्रष्ट लोगों को जल्दी से जवाबदेह ठहराने का रास्ता साफ करने के लिए अधिकारियों की क्षमता निर्माण पर जोर दिया।
कार्यक्रम के दौरान, विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक और सीबीआई के सर्वश्रेष्ठ जांच अधिकारियों के लिए स्वर्ण पदक प्राप्त करने वालों का एक अलंकरण समारोह भी आयोजित किया गया। इसमें प्रधानमंत्री ने पुरस्कार विजेताओं को पदक प्रदान किए। प्रधानमंत्री ने शिलांग, पुणे और नागपुर में सीबीआई के नवनिर्मित कार्यालय परिसरों का भी उद्घाटन किया। उन्होंने सीबीआई के हीरक जयंती समारोह वर्ष को चिह्नित करते हुए एक डाक टिकट और स्मारक सिक्का जारी किया। उन्होंने सीबीआई के ट्विटर हैंडल को भी लॉन्च किया। उन्होंने बैंक धोखाधड़ी पर सीबीआई के अद्यतन प्रशासन मैनुअल को भी जारी किया।
प्रधानमंत्री ने इस बात को रेखांकित किया कि सीबीआई ने अपने काम और कौशल से देश के आम नागरिकों में विश्वास पैदा किया है। सीबीआई सच्चाई और न्याय के लिए एक ब्रांड की तरह है । उन्होंने कहा कि आज भी जब कोई न सुलझा हुआ मामला आता है, तो इस मामले को सीबीआई को सौंपने के लिए आम सहमति बनती है। कभी-कभी सीबीआई को मामला सौंपने के लिए शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो जाते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि आपसी विश्वास के माहौल में ही संयुक्त और बहु-विषयक जांच संभव होगी। उन्होंने आगाह किया कि भारत के सामाजिक ताने-बाने, उसकी एकता और भाईचारे, उसके आर्थिक हितों और उसकी संस्थाओं पर हमले भी बढ़ेंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सीबीआई से संबंधित मामलों के लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का एक संग्रह भी आज लॉन्च किया गया है जो हमें सीबीआई के इतिहास की एक झलक देता है। प्रधानमंत्री ने साइबर अपराधों से निपटने के लिए एक अभिनव दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने तकनीक-सक्षम उद्यमियों और युवाओं को जोड़ने और विभाग में तकनीक-प्रेमी युवा अधिकारियों का बेहतर उपयोग करने का सुझाव दिया। उन्होंने ब्यूरो में 75 प्रक्रियाओं और प्रणालियों को संकलित करने के लिए सीबीआई की सराहना की जिन्हें समाप्त किया जा सकता है और उन्हें इस पर समयबद्ध तरीके से काम करने के लिए कहा।
केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह, प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, कैबिनेट सचिव राजीव गौबा और सीबीआई निदेशक सुबोध कुमार जायसवाल इस अवसर पर उपस्थित थे।