हैदराबाद। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (नक्सली) के विभिन्न रैंकों के 47 भूमिगत कैडरों ने यहां शनिवार को तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक बी. शिवाधर रेड्डी के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वालों में हेमला आयथु उर्फ विज्जा (दक्षिण बस्तर प्रभारी) और पोडियम लाचु उर्फ मनोज (9वीं प्लाटून के कमांडर) जैसे बड़े नाम शामिल हैं। ये सभी 47 कैडर छत्तीसगढ़ राज्य के निवासी हैं। प्रत्येक आत्मसमर्पण करने वाले कैडर को 25,000 रुपये की अंतरिम राहत राशि सौंपी गई है।
आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों ने 32 हथियार भी सौंपे हैं, जिनमें एक लाइट मशीन गन ( एलएमजी) और चार एके-47 राइफलें शामिल हैं। इसके अलावा, विभिन्न क्षमता के 515 जिंदा कारतूस भी जमा किए गए। डीजीपी बी. रेड्डी ने बताया कि दक्षिण बस्तर डिवीजनल कमेटी के लगभग सभी प्रमुख नेताओं और सशस्त्र कैडरों के आत्मसमर्पण या निष्क्रिय होने के बाद, यह कमेटी अब पतन की कगार पर है। इस वर्ष अब तक तेलंगाना में कुल 260 भूमिगत नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। यह सरकार की पुनर्वास नीतियों में बढ़ते विश्वास और सुरक्षा बलों के निरंतर दबाव को दर्शाता है। शीर्ष व मध्यम स्तर के नेतृत्व का यह आत्मसमर्पण नक्सली संगठनात्मक ढांचे पर एक निर्णायक प्रहार है।
डीजीपी ने जानकारी दी कि अब तेलंगाना के केवल चार सक्रिय भूमिगत कैडर बचे हैं, जो राज्य से बाहर (छत्तीसगढ़ और झारखंड में) सक्रिय हैं। इनमें से दो केंद्रीय समिति के सदस्य हैं। इनके नाम हैं- मुप्पला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति (पूर्व महासचिव), पसनुरी नरहरि उर्फ संतोष, जादे रत्ना बाई उर्फ सुजाता और वार्था शेखर उर्फ मंगथु।
डीजीपी ने उल्लेख किया कि गणपति, जो 2007 से सक्रिय भूमिका से दूर हैं, तेलंगाना के इतिहास में बचे हुए एकमात्र महत्वपूर्ण कैडर हैं। सरकार अब शेष कैडरों को भी हिंसा का रास्ता छोड़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।पुलिस के अनुसार 2024 से अबतक कुल 818 कैडर आत्मसमर्पण कर चुके हैं। पुलिस ने शेष बचे कैडरों से सशस्त्र संघर्ष छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की है।

