Close Menu
Azad SipahiAzad Sipahi
    Facebook X (Twitter) YouTube WhatsApp
    Saturday, April 25
    • Jharkhand Top News
    • Azad Sipahi Digital
    • रांची
    • हाई-टेक्नो
      • विज्ञान
      • गैजेट्स
      • मोबाइल
      • ऑटोमुविट
    • राज्य
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
    • रोचक पोस्ट
    • स्पेशल रिपोर्ट
    • e-Paper
    • Top Story
    • DMCA
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Azad SipahiAzad Sipahi
    • होम
    • झारखंड
      • कोडरमा
      • खलारी
      • खूंटी
      • गढ़वा
      • गिरिडीह
      • गुमला
      • गोड्डा
      • चतरा
      • चाईबासा
      • जमशेदपुर
      • जामताड़ा
      • दुमका
      • देवघर
      • धनबाद
      • पलामू
      • पाकुर
      • बोकारो
      • रांची
      • रामगढ़
      • लातेहार
      • लोहरदगा
      • सरायकेला-खरसावाँ
      • साहिबगंज
      • सिमडेगा
      • हजारीबाग
    • विशेष
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • देश
    • दुनिया
    • राजनीति
    • राज्य
      • मध्य प्रदेश
    • स्पोर्ट्स
      • हॉकी
      • क्रिकेट
      • टेनिस
      • फुटबॉल
      • अन्य खेल
    • YouTube
    • ई-पेपर
    Azad SipahiAzad Sipahi
    Home»राज्य»सासाराम: 26 एकड़ पैतृक जमीन पर जालसाजी, न्याय के लिए भटक रही बुजुर्ग महिला
    राज्य

    सासाराम: 26 एकड़ पैतृक जमीन पर जालसाजी, न्याय के लिए भटक रही बुजुर्ग महिला

    shivam kumarBy shivam kumarApril 25, 2026No Comments4 Mins Read
    Facebook Twitter WhatsApp Telegram Pinterest LinkedIn Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter WhatsApp Telegram LinkedIn Pinterest Email

    सासाराम (रोहतास)। नियम-कानून की जटिलताओं के बीच एक बुजुर्ग महिला की पीड़ा देश की न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़ी कर रही है। रोहतास जिले के कोचस प्रखंड स्थित सरेयां गांव की रहने वाली आशा पांडेय (70) उम्र की अंतिम दहलीज पर खड़ी हैं। किडनी और शुगर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रही यह महिला अपनी ही छोटी बहन द्वारा किए गए कागजी जालसाजी के खिलाफ न्याय की गुहार लगाते-लगाते थक चुकी है, लेकिन आज तक उसे इंसाफ नहीं मिल पाया है।

    क्या है पूरा विवाद?

    दरअसल, आशा पांडेय के पिता स्वर्गीय मार्कण्डेय तिवारी की 26 एकड़ 1 डिसमिल पैतृक भूमि थी। 26 जून 1999 को उनके निधन के बाद यह संपत्ति उनकी विधवा पत्नी राधिका कुंवर और तीन पुत्रियों – आशा पांडेय, शीला त्रिगुण और पद्मावती मिश्रा – के नाम हो गई। वर्ष 2011 तक सब कुछ सामान्य था, लेकिन तभी आशा पांडेय को पता चला कि उनकी छोटी बहन पद्मावती मिश्रा ने गलत कागजात और जाली हस्ताक्षर के जरिए पूरी जमीन अपने नाम करने की कोशिश की।

    आशा ने इसकी शिकायत लोक अदालत, सासाराम में दर्ज कराई। 16 मार्च 2012 को लोक अदालत ने स्पष्ट कहा कि अदालत को गलत जानकारी देकर संधि पत्र पारित कराया गया था, और उक्त डिक्री को निरस्त कर दिया। इसके बाद चारों वारिसों (मां और तीनों बेटियों) के नाम से खारिज-दाखिल हुआ और मालगुजारी रसीद भी चारों के नाम से कटने लगी। ऐसा लगा कि मामला सुलझ गया, लेकिन असल गड़बड़ी यहीं शुरू हुई।

    फिर से रचा गया साजिश का खेल

    आशा पांडेय के मुताबिक, पद्मावती मिश्रा ने हार नहीं मानी। 2016 में उसने फिर से जमीन हड़पने की साजिश रची। आरोप है कि उसने अंचलाधिकारी को अपने पक्ष में कर लिया और बिना किसी सूचना के पूरी 26 एकड़ जमीन अपने और अपने दो बेटों – निखिल कुमार मिश्रा व राहुल कुमार मिश्रा – के नाम करा दी। राजस्व अभिलेखों में धांधली करते हुए आशा, शीला और मां राधिका के नाम हटा दिए गए। नतीजतन, 19 एकड़ 23 डिसमिल पर निखिल और राहुल के नाम मालगुजारी कटने लगी, जबकि 6 एकड़ 78 डिसमिल पद्मावती के नाम चला गया। यह पूरी प्रक्रिया इतनी गुप्त रूप से हुई कि अन्य बहनों को भनक तक नहीं लगी।

    बेटों का नाम कैसे दर्ज हुआ? मां जिंदा थीं

    आशा पांडेय का कहना है, “मेरी मां (राधिका कुंवर) उस समय जीवित थीं। ननिहाल की संपत्ति में मां के जीवित रहते बेटों का सीधा अधिकार नहीं होता। फिर ये दोनों लड़के (भतीजे) राजस्व रिकॉर्ड में कैसे आ गए?” उन्होंने यह भी बताया कि लोक अदालत पहले ही पद्मावती की डिक्री को खारिज कर चुकी थी, तो फिर दोबारा नामांतरण किस आधार पर हुआ? यह एक बड़ा कानूनी सवाल है।

    बुजुर्ग महिला की व्यथा

    बीमारी और बढ़ती उम्र के कारण आशा पांडेय अब ज्यादा भागदौड़ करने की स्थिति में नहीं हैं। आर्थिक संकट भी सिर पर है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने हिस्से की कुछ जमीन दयाशंकर तिवारी, कृपा निधान तिवारी, रजनीकांत तिवारी, मालती देवी, आरती देवी और मनीष तिवारी जैसे कई लोगों को बेच दी है, लेकिन कोचस अंचल कार्यालय न तो उनके नाम नामांतरण कर रहा है और न ही यह स्पष्ट कर पा रहा है कि आखिर तीन बहनों की संपत्ति एक बहन और उसके बेटों के नाम कैसे दर्ज हो गई।

    न्याय की गुहार

    आशा पांडेय ने शासन-प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा, “भू-माफियाओं और जालसाजों को कठोरतम सजा मिलनी चाहिए। मैं अब बहुत थक गई हूं, लेकिन फिर भी उम्मीद है कि सरकार मेरी आवाज सुनेगी।” उनका दर्द यह भी है कि सिस्टम की आंखों में धूल झोंककर गैरकानूनी तरीके से जमीन के रिकॉर्ड बदल दिए गए, और आज वह न्याय के लिए दर-दर भटक रही हैं।

    यह मामला न केवल आशा पांडेय के परिवार की त्रासदी है, बल्कि राजस्व व्यवस्था में बड़ी खामियों को भी उजागर करता है। अब देखना यह है कि प्रशासन कितनी गंभीरता से इस मामले की जांच करता है और पीड़िता को उसका हक दिलाया जाता है या नहीं।

    Share. Facebook Twitter WhatsApp Telegram Pinterest LinkedIn Tumblr Email
    Previous Articleस्कॉर्पियो और बुलेट में टक्कर, सांसद प्रतिनिधि के इंजीनियर पुत्र की मौत
    Next Article नेपाल: हिरासत में दलित युवक की मौत पर भड़का आक्रोश, सत्ताधारी दल के 5 सांसद बैठे धरने पर
    shivam kumar

      Related Posts

      रामूडीहा में भीषण अग्निकांड, 05 मासूम झुलसे, विधायक की तत्परता से मिली राहत

      April 22, 2026

      इंदौरः पीडब्ल्यूडी के तीन अधिकारी रिश्वत लेते गिरफ्तार

      April 22, 2026

      नोएडा श्रमिक हिंसा मामले में बिगुल मजदूर दस्ता के दो सदस्य गिरफ्तार

      April 20, 2026
      Add A Comment
      Leave A Reply Cancel Reply

      Recent Posts
      • खूंटी में गहराया जल संकट, तजना नदी का जलस्तर घटने से साढ़े चार हजार घरों की जलापूर्ति ठप
      • केजरीवाल के नए बंगले को लेकर भाजपा का तंज- पार्टी का नाम बदल कर रख देना चाहिए आलीशान आदमी पार्टी
      • नेपाल: हिरासत में दलित युवक की मौत पर भड़का आक्रोश, सत्ताधारी दल के 5 सांसद बैठे धरने पर
      • सासाराम: 26 एकड़ पैतृक जमीन पर जालसाजी, न्याय के लिए भटक रही बुजुर्ग महिला
      • स्कॉर्पियो और बुलेट में टक्कर, सांसद प्रतिनिधि के इंजीनियर पुत्र की मौत
      Read ePaper

      City Edition

      Follow up on twitter
      Tweets by azad_sipahi
      Facebook X (Twitter) Pinterest Vimeo WhatsApp TikTok Instagram

      Palamu Division

      • Garhwa
      • Palamu
      • Latehar

      Kolhan Division

      • West Singhbhum
      • East Singhbhum
      • Seraikela Kharsawan

      North Chotanagpur Division

      • Chatra
      • Hazaribag
      • Giridih
      • Koderma
      • Dhanbad
      • Bokaro
      • Ramgarh

      South Chotanagpur Division

      • Ranchi
      • Lohardaga
      • Gumla
      • Simdega
      • Khunti

      Santhal Pargana Division

      • Deoghar
      • Jamtara
      • Dumka
      • Godda
      • Pakur
      • Sahebganj

      Subscribe to Updates

      Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

      © 2026 AzadSipahi. Designed by Launching Press.
      • Privacy Policy
      • Terms
      • Accessibility

      Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

      Go to mobile version