धनबाद: पंचायत बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले सोमवार को धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर प्रदर्शन कर रहे महिला, पुरुष व बच्चों पर धनबाद पुलिस ने खूब लाठियां भांजी। इस लाठीचार्ज में कई महिलाएं बुरी तरह घायल हो गयीं। पंचायत बचाओ संघर्ष समिति के द्वारा रणधीर वर्मा चौक पर धरना-प्रदर्शन किया जा रहा था। ये आंदोलनकारी ग्रामीण क्षेत्रों को निगम क्षेत्र में शामिल करने का विरोध कर रहे थे। जदयू प्रदेश अध्यक्ष सह पूर्व मंत्री जलेश्वर महतो राजद नेता सह पूर्व झरिया विधायक आबो देवी, पूर्व सिंदरी विधायक सह मासस नेता आनंद महतो सरीखे नेताओ के नेतृत्व में आंदोलन चल रहा था। उनकी मांग है कि नगर से सटे ग्रामीण इलाकों को पंचायत क्षेत्र में ही रखा जाये। उसे शहरी क्षेत्र नहीं बनाया जाये। प्रदर्शनकारियों में झरिया, भूली, सिंदरी के ग्रामीण थे।
इससे पूर्व सैकडों ग्रामीणों ने जिला मुख्यालय को जाम कर दिया था। ग्रामीण क्षेत्रों को नगर निगम में शामिल करने के विरोध में लोग सड़क पर उतरे थे। निगम मुख्यालय से हल के साथ जुलूस निकाला गया। सड़क पर हल चलाकर विरोध जताया। 43 पंचायतों को निगम से हटाकर पंचायत में शामिल करने की मांग के नारे बुलंद कर रहे थे। वक्ताओं की दलील थी कि जिन 43 पंचायतों को निगम में शामिल किया गया है उन पंचायतों में ग्रामीणों की आजीविका खेती है।

प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने डीसी मुख्यालय व सड़क को पूरी तरह से जाम कर दिया था। सड़क पर आवाजाही ठप थी। डीएसपी ट्रैफिक का वाहन भी प्रदर्शन कारियों ने रोक रखा था। डीसी कोर्ट जा रहे कैदी को भी रोका गया था। जिला पुलिस प्रशासन ने प्रर्दशनकारियों को पहले समझाने की कोशिश की। लेकिन प्रदर्शन कर रहे ग्रामीण हटने को तैयार नहीं थे। मजबूरन पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लाठी चार्ज किया गया। जिसमें आधा दर्जन महिलाएं घायल है। अफरा तफरी के माहौल में कई निर्दोश भी लाठी चार्ज के शिकार हुए।

क्या साबित करना चाहती है पुलिस?
ग्रामीणों प्रदर्शन कारियों के खिलाफ बर्बरता पूर्ण कार्रवाई की निंदा की जा रही है। सवाल उठ रहे हैं जब शांति से सड़क जाम हटाया जा सकता था, प्रदर्शन कारियों को शांत कराया जा सकता था, फिर लाठी भांजने की जरुरत धनबाद पुलिस को क्यों पड़ी? कहीं आमजन की आवाज को दबाने की कोशिश तो नहीं? सवाल यह भी उठ रहें हैं कि दौड़ा दौड़ा कर ग्रामीणों को पीटा गया जबकि वे लोग शांति से प्रदर्शन करते हुए अपनी मांग को सरकार तक पहुंचाना चाहते थे, कोई पत्थरबाजी या तोड़फोड़ नहीं कर रहे थे। फिर उनपर अत्याचार क्यों, क्यों उन्हें खदेड़ खदेड़ कर पीटा गया? धनबाद पुलिस इससे क्या साबित करना चाहती है।

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